नवादा जिले के मेसकौर प्रखंड स्थित सीतामढ़ी में लगने वाले वार्षिक मेले के लिए जल्द ही बोली प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है। इसके लिए प्रशासनिक तैयारियां भी तेज हो गई हैं। यह मेला हर साल अगहन पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित होता है।
जिलाधिकारी रवि प्रकाश ने 17 नवंबर 2025 को एक पत्र जारी कर सीतामढ़ी मेले के वित्तीय वर्ष 2025-26 के अल्पकालीन बंदोबस्ती की आम सूचना को समाचार पत्रों में प्रकाशित करने का निर्देश दिया है। यह निर्देश मेले के सुचारु आयोजन के लिए दिया गया है।
रामायण काल से है इस स्थान का संबंध
मेसकौर प्रखंड का सीतामढ़ी क्षेत्र रामायण काल से जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि वनवास के दौरान माता सीता अपने पुत्रों लव और कुश के साथ यहीं रही थीं। इस स्थान पर दूर-दूर से श्रद्धालु पूजा-अर्चना करने और मेला घूमने आते हैं। पिछले साल इसे वार्षिक मेले के रूप में भी मान्यता मिली है।
यह मेला ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोगों को आकर्षित करता है। मेले में विभिन्न प्रकार की दुकानें लगती हैं, जिनमें विशेष रूप से लकड़ी के फर्नीचर जैसे पलंग, चौकी और खटिया आदि सामान बेचे जाते हैं। ग्रामीण यहां पहुंचकर अच्छी खरीदारी करते हैं।
मेले में कई झूले भी लगाए जाते हैं, जो बच्चों और बड़ों के लिए आकर्षण का केंद्र होते हैं। लगभग एक पखवाड़े तक पूरा सीतामढ़ी क्षेत्र सैलानियों की चहल-पहल और दुकानों के खुलने से गुलजार रहता है।
