वरिष्ठ नागरिकों के भरण–पोषण की जिम्मेदारी वयस्क संतान पर : सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकार

दस्तक 7मीडिया ,दरभंगा /

“वरिष्ठ नागरिकों तथा ऐसे माता–पिता, जो स्वयं अपना भरण–पोषण करने में असमर्थ हैं, उनके देखभाल और आर्थिक जिम्मेवारी उनकी वयस्क संतान या वे रिश्तेदार निभाएंगे, जो भविष्य में उनकी संपत्ति पर अधिकार के दावेदार होंगे।”
उक्त बातें जिला विधिक सेवा प्राधिकार, दरभंगा की सचिव आरती कुमारी ने पेंशनर समाज के बीच आयोजित जागरूकता कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कही।

उन्होंने बताया कि माता–पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण–पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007 में स्पष्ट प्रावधान है कि भरण–पोषण विवादों की सुनवाई हेतु अनुमंडल स्तर पर ट्रिब्यूनल का गठन किया गया है। किसी भी पीड़ित वरिष्ठ नागरिक द्वारा आवेदन देने पर 90 दिनों के भीतर सुनवाई कर संबंधित पुत्र/पुत्री अथवा रिश्तेदार को अधिकतम ₹10,000 प्रतिमाह भरण–पोषण राशि देने का आदेश पारित किया जा सकता है।

सचिव ने यह भी बताया कि यदि किसी बुजुर्ग ने यह शर्त रखकर अपनी संपत्ति दान की है कि दान प्राप्तकर्ता उनका भरण–पोषण करेगा, परंतु वह इसका पालन नहीं करता है, तो ऐसा दान शून्य घोषित कर दिया जाएगा। इसे कानून की दृष्टि में कपट, प्रपीड़न या अनावश्यक प्रभाव में किया गया दान माना जाएगा।

उन्होंने आगे कहा कि यदि किसी वरिष्ठ नागरिक को अपने शरीर या संपत्ति पर खतरे की आशंका हो, तो वे सीधे जिला पदाधिकारी को इसकी सूचना दे सकते हैं। साथ ही नालसा योजना 2016 के तहत निःशुल्क कानूनी सहायता जिला विधिक सेवा प्राधिकार से प्राप्त की जा सकती है। इसके अतिरिक्त नालसा का टोल फ्री नंबर 15100 भी 24×7 उपलब्ध है।

कार्यक्रम में अधिवक्ता पुरुषोत्तम कुमार, प्रयास संस्था के विरेंद्र कुमार झा तथा हेल्पेज इंडिया के प्रोजेक्ट मैनेजर राजीव कुमार ने भी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।
मौके पर पेंशनर समाज के सदस्य अमर कुमार झा, अरुण कुमार, शिव कुमार सहित अनेक लोग उपस्थित थे।