दरभंगा के तीन मंत्रियों की प्रतिष्ठा दांव पर ,बिहार में सियासी ‘फैसले का दिन कल “। 29 मंत्रियों की भाग्य के हो जाएंगे फैसले  , नीतीश की सत्ता में वापसी के आसार तेज,

दस्तक 7मीडिया /संजय कुमार राय 

बिहार की सियासत अब अंतिम मोड़ पर है। 14 नवंबर को विधानसभा चुनाव के नतीजे आने वाले हैं और इसके साथ ही यह तय होगा कि सत्ता की चाबी किसके हाथ में जाएगी। जैसे-जैसे वक्त बीत रहा है, प्रत्याशियों की धड़कनें तेज होती जा रही हैं। एनडीए के 29 मंत्री इस बार मैदान में हैं ,यानी सत्ता के बड़े चेहरों की किस्मत अब पूरी तरह से EVM में कैद है जो कल निर्णय कर देंगें।

दरभंगा जिले की बात करें तो यहां से तीन मंत्रियों की प्रतिष्ठा सीधी दांव पर है इसमें नगर विधायक संजय सरावगी, बहादुरपुर विधान सभा से मदन सहनी और जाले विधान सभा से जीवेश कुमार। इनमें दो भाजपा और एक जेडीयू कोटे से हैं।पूरे जिला वासियों की नजर इन तीन सीटों पर हे ,चर्चाएं गरम हे ,कोई हार तों कोई जीत का अनुमान लगा रहें हे।

वहीं, राज्यस्तर पर भाजपा के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा, जेडीयू के विजय कुमार चौधरी, श्रवण कुमार, विजेंद्र प्रसाद यादव जैसे दिग्गजों का राजनीतिक भविष्य भी इसी नतीजे पर टिका है।

हालांकि एग्जिट पोल के बाद एनडीए खेमे में उत्साह साफ झलक रहा है, लेकिन अंतिम फैसला अब EVM के सीने में बंद है, जो कल खुलेगा। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि इस बार जेडीयू पहले से अधिक मजबूत होकर उभरेगी, जबकि भाजपा की स्थिति थोड़ी कमजोर मानी जा रही है।

जेडीयू के उभार के पीछे नीतीश सरकार की लोकलुभावन योजनाओं का बड़ा असर माना जा रहा है ,सवा सौ यूनिट मुफ्त बिजली, महिलाओं को दो लाख रुपये तक का ऋण, वृद्धा पेंशन में बढ़ोतरी और हर खाते में दस हजार रुपये की सहायता राशि जैसी योजनाओं ने ग्रामीण इलाकों में पार्टी को नई पकड़ दी है हालांकि इन योजनाओ की घोषणा तों डबल इंजन सरकार की थी।

पिछले चुनाव में लोजपा रामविलास के मैदान में उतरने से जेडीयू को काफी नुकसान हुआ था, लेकिन इस बार यह फैक्टर पूरी तरह नदारद है। ऐसे में जेडीयू के सीटों में बढ़ोतरी की संभावना पर पार्टी आत्मविश्वास में है।

भाजपा के कुछ सिटिंग विधायक जनता से जुड़ाव नहीं रख सके, कार्यकर्ताओं में नाराज़गी रही, और जातीय समीकरणों में भी कई जगह गड़बड़ी दिखी। इसके बावजूद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के काम और वादों पर लोगों का भरोसा कायम है। बिहार की जनता के लिए आज भी “नीतीश मतलब भरोसा” का भाव बना हुआ है।

वहीं, राजद के लिए चुनौती अब भी वही है ,जनता के मन से जंगलराज का डर मिटा नहीं है। लालू प्रसाद की छवि अब भी लोगों को तेजस्वी यादव से दूरी बनाने को मजबूर करती है।

आखिरी फैसला अब कुछ घंटों की दूरी पर है।
लेकिन माहौल और सियासी हवा यही कह रही है ,
“फिर से नीतीश!”