गौड़ा बौराम विधानसभा, प्रशासनिक अव्यवस्था का खामियाजा भुगतेंगे मतदाता, 3 किमी दूर जाना पड़ेगा वोट डालने

दस्तक7मिडिया, अमीत झा , गौड़ा बौराम,दरभंगा।

विधानसभा चुनाव में गौड़ा बौराम विधानसभा क्षेत्र की लचर प्रशासनिक व्यवस्था के कारण सैकड़ों मतदाताओं को अपने मताधिकार का प्रयोग करने में भारी कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है। चुनाव आयोग और जिला प्रशासन के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद, मतदान केंद्रों के भौतिक सत्यापन और व्यवस्थितीकरण में घोर लापरवाही सामने आई है।
बताया जाता है कि जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह जिलाधिकारी ने सभी निर्वाची पदाधिकारी और बूथ लेवल ऑफिसर को मतदान केंद्रों का भौतिक सत्यापन करने और सुनिश्चित करने का कड़ा निर्देश दिया था कि सभी मतदाताओं के नाम उनके नजदीक के केंद्र की सूची में शामिल हों। इस सत्यापन के बाद एक विस्तृत प्रतिवेदन भी मांगा गया था।
बावजूद इसके, निचले स्तर के पदाधिकारियों ने इस महत्वपूर्ण कार्य की पूरी तरह से अनदेखी की। नतीजतन, मतदाता सूची में गंभीर विसंगतियां सामने आई हैं, जो मतदान प्रतिशत को भी प्रभावित कर सकती हैं।
इस प्रशासनिक चूक का सबसे ज्वलंत उदाहरण मनसारा पंचायत के पलवा गांव में देखने को मिला है। कुछ मतदाताओं के नाम गांव के भीतर 222 और 223 मतदान केंद्र की सूची में हैं। जबकि,गांव के शेष बचे सैकड़ों मतदाताओं को अपने मताधिकार का प्रयोग करने के लिए गांव से एक किमी के बदले
लगभग तीन किलोमीटर की दूरी तय कर 224 मतदान केन्द्र फरसाही गांव जाना पड़ेगा। ग्रामीणों का कहना है कि महिनों से दो स्थानों पर बने कटाव को ठीक नहीं किया गया। जिससे बुजुर्गों, दिव्यांगों और महिलाओं के लिए यह लंबी दूरी तय करना एक बड़ी चुनौती होगी, खासकर मतदान के दिन की भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था के बीच। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से तुरंत इस त्रुटि को सुधारने और सभी मतदाताओं को उनके निवास स्थान के निकटतम मतदान केंद्र पर ही वोट डालने की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।
प्रशासन की इस लापरवाही पर लोग गंभीर सवाल उठ रहे हैं–जब जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए थे, तो उनकी अवहेलना क्यों हुई?
मतदान केंद्रों के भौतिक सत्यापन की रिपोर्ट में क्या दर्शाया गया था?
क्या इन विसंगतियों के चलते मतदाता हतोत्साहित होकर मतदान से विमुख नहीं होंगे?
गौड़ा बौराम विधानसभा क्षेत्र में निर्वाची अधिकारी की यह निष्क्रियता सीधे तौर पर स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के सिद्धांत पर प्रश्नचिह्न लगाती है। जिला प्रशासन को इस गंभीर चूक का संज्ञान लेते हुए तुरंत सुधारात्मक कार्रवाई करनी चाहिए ताकि कोई भी मतदाता प्रशासनिक लापरवाही के कारण अपने संवैधानिक अधिकार से वंचित न रह जाए।