अररिया में बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के तहत अररिया जिले में लोकतंत्र का एक सराहनीय दृश्य देखने को मिला।यहां 85 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांग मतदाताओं के लिए विशेष व्यवस्था के तहत घर-घर जाकर मतदान कराया गया।निर्वाचन आयोग के निर्देश पर जिला प्रशासन द्वारा यह पहल सफलतापूर्वक संपन्न की गई, जिससे मतदान प्रक्रिया और अधिक समावेशी बनी।

जिन्होंने प्रपत्र 12-डी भरा, उनके घर पहुंची मतदान टीम

जिन मतदाताओं ने पूर्व में प्रपत्र 12-डी भरकर होम वोटिंग की मांग की थी, उनके घरों पर निर्वाचन कर्मियों की टीम पहुंची।टीम में पोलिंग अधिकारी, माइक्रो ऑब्जर्वर और सुरक्षा बल के जवान शामिल थे।उन्होंने मतदाताओं की पहचान सत्यापित करने के बाद बैलेट पेपर से गोपनीय मतदान कराया।पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से संपन्न हुई और सभी नियमानुसार दस्तावेजीकरण किया गया।

घर बैठे वोट डालकर खुश हुए वरिष्ठ मतदाता

यह सुविधा उन लोगों के लिए वरदान साबित हुई जो स्वास्थ्य या शारीरिक कारणों से मतदान केंद्र तक नहीं जा पाते।एक 88 वर्षीय मतदाता ने कहा, “घर पर वोट डालने का मौका मिला, यह हमारे जैसे बुजुर्गों के लिए बहुत बड़ी राहत है।”वहीं एक दिव्यांग मतदाता ने इसे “लोकतंत्र को हर घर तक पहुंचाने वाला ऐतिहासिक कदम” बताया।

पूर्ण गोपनीयता और सुरक्षा के बीच संपन्न हुआ मतदान

जिला निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि होम वोटिंग की पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और सुरक्षित रही।सभी मतदान दलों की गतिविधियां सीसीटीवी कवरेज और वीडियोग्राफी के तहत रिकॉर्ड की गईं।अररिया जिले में ऐसे सैकड़ों मतदाताओं ने इस सुविधा का लाभ उठाया, जिससे मतदान प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद है।

लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में मिसाल बना अररिया मॉडल

जिला प्रशासन ने कहा कि होम वोटिंग जैसी पहले लोकतंत्र को हर नागरिक तक पहुंचाने की दिशा में बड़ा कदम हैं।यह मॉडल बिहार के अन्य जिलों के लिए प्रेरणादायक उदाहरण साबित हो सकता है।सूचना जनसंपर्क कार्यालय ने बताया कि इस पहल का मकसद हर मतदाता को उसका मताधिकार सुरक्षित और सम्मानजनक ढंग से दिलाना है।