मूसलाधार बारिश ने छीना किसानों का निवाला, गौड़ा बौराम में धान की हजारों एकड़ फसल तबाह, कर्ज में डूबे किसान
मूसलाधार बारिश ने छीना किसानों का निवाला, गौड़ा बौराम में धान की हजारों एकड़ फसल तबाह, कर्ज में डूबे किसान
मूसलाधार बारिश ने छीना किसानों का निवाला, गौड़ा बौराम में धान की हजारों एकड़ फसल तबाह, कर्ज में डूबे किसान
दस्तक7मिडिया, अमीत झा, गौड़ा बौराम।
प्रकृति के प्रकोप ने गौड़ा बौराम क्षेत्र के किसानों पर ऐसा कहर ढाया है कि उनके घरों में चूल्हा जलना मुश्किल हो गया है। विगत तीन दिनों से हो रही अनवरत और मूसलाधार वर्षा के कारण हजारों एकड़ में खड़ी और काटी गई धान की तैयार फसल पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई है। किसानों की मेहनत और साल भर की उम्मीदें पानी में बह गई हैं, जिससे क्षेत्र में एक गहरा संकट और निराशा का माहौल है।
बारिश की मार इतनी भीषण है कि जो फसल कटकर खेतों में रखी थी, उसमें नमी के कारण अंकुर निकल आए हैं। फसल का यह दाना अब केवल पशुओं के चारे लायक भी मुश्किल से बचा है। वहीं, जो फसल अभी खेतों में खड़ी थी, वह पानी भरने और तेज हवा के कारण जमीन पर बिछ गई है, जिससे उसका दाना काला पड़ गया है और वह कटाई के लायक नहीं बची है।
इस आपदा से वे किसान सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं, जिन्होंने बैंक या साहूकारों से कर्ज लेकर खेती की थी। अब फसल नष्ट होने के बाद वे न केवल कर्ज चुकाने में असमर्थ हैं, बल्कि उनके सामने परिवार के भरण-पोषण का भी संकट खड़ा हो गया है। कई किसान अब सर पकड़ कर रोने की स्थिति में हैं, क्योंकि यह घाटा उन्हें वर्षों पीछे धकेल देगा।
बलथरी निवासी किसान जनक मुखिया की व्यथा इस क्षेत्र के सैकड़ों किसानों का दर्द बयां करती है। उन्होंने लगभग 20 एकड़ ज़मीन पर धान की खेती की थी। उन्होंने बताया कि यह खेती वह बाटदारी (बटाईदारी) पद्धति पर करते हैं। इस पद्धति में फसल का अधिकांश हिस्सा (लगभग 85%) ज़मींदारों के पास चला जाता है, और उन्हें लाभ का केवल लगभग 15% हिस्सा ही मिल पाता है।
किसान जनक मुखिया ने बताया कि यह खेती अब पूरा घाटे का सौदा होने को है। हम केवल 15% के लिए इतना बड़ा जोखिम उठाते हैं, लेकिन अब तो लागत भी डूब गई है। हम कैसे चुकाएंगे यह कर्ज?
कई ऐसे छोटे बाटेदार किसान हैं जिनका पूरा घर-परिवार केवल इसी खेती पर निर्भर करता है। फसल तबाह होने के कारण उनके सामने अब कोई विकल्प नहीं बचा है। उन्हें आशंका है कि उन्हें मजबूरी में रोजी-रोटी की तलाश में शहरों की ओर पलायन करना पड़ेगा।
किसानों ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से तत्काल फसल क्षति का आकलन करवाने और पर्याप्त मुआवजा देने की मांग की है। यह अति आवश्यक है कि इस संकट की घड़ी में सरकार आगे बढ़कर अन्नदाताओं को सहारा दे, ताकि वे कर्ज के जाल से निकल सकें और उनका मनोबल टूटने से बचाया जा सके।