बिरौल अनुमंडल में छठ महापर्व का महात्म्यबिरौल अनुमंडल में छठ महापर्व का महात्म्य,भक्ति और आस्था का सैलाब, घाटों पर सैकड़ों ने दिया संध्या अर्घ्य,भक्ति और आस्था का सैलाब, घाटों पर सैकड़ों ने दिया संध्या अर्घ्य,

दस्तक7मिडिया, बिरौल, दरभंगा।

लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा के अवसर पर बिरौल अनुमंडल क्षेत्र में भक्ति, श्रद्धा और हर्षोल्लास का अभूतपूर्व संगम देखने को मिला। चार दिवसीय इस अनुष्ठान के तीसरे दिन, सोमवार को, लाखों छठ व्रतियों ने पवित्र नदियों, तालाबों और कृत्रिम जलाशयों के घाटों पर पहुंचकर अस्ताचलगामी भगवान सूर्य को संध्या अर्घ्य दिया। इस दौरान, संपूर्ण अनुमंडल क्षेत्र ‘जय छठी मईया’ और ‘सूर्य देव की जय’ के जयघोष से गुंजायमान रहा, जिससे वातावरण पूरी तरह से भक्तिमय हो गया।


बिरौल के विभिन्न घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी, जहां छठ व्रतियों ने कड़ा उपवास रखते हुए सूप और दउरा में फल, ठेकुआ, गन्ना और अन्य पारंपरिक पूजन सामग्री सजाकर विधि-विधान से अर्घ्य की रस्म पूरी की।
सुपौल बाजार हाटगाछी, रामनगर दुर्गा स्थान, मंदिर घाट, जिरात, बिरौल चौक,हनुमाननगर, डुमरी, बलिया, बेंक, उछटी, पोखराम, सहसराम, पटनिया, अफजला, गाड़ा मेडिकल परिसर सहित सैकड़ों छोटे-बड़े घाटों पर सैकड़ों श्रद्धालुओं ने एक साथ डुबते हुए सूर्य को नमन किया। वहीं गौड़ा बौराम, कुशेश्वरस्थान, किरतपुर प्रखंड क्षेत्रों में छठ पूजा धुमधाम से मनाया जा रहा है।


छठ पूजा को लेकर प्रशासन और स्थानीय पूजा समितियों ने सुरक्षा और सुविधा के पुख्ता इंतजाम किए थे। घाटों की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया गया था और उन्हें आकर्षक ढंग से सजाया गया है।
बिरौल के घाटों को इस वर्ष विशेष रूप से विभिन्न प्रकार की रंगीन लाइटों और तोरण द्वारों से सजाया गया था, जिससे रात के समय घाटों का दृश्य किसी मनोहारी उत्सव स्थल जैसा लग रहा था। रोशनी की यह भव्यता छठ के महात्म्य को और बढ़ा रही थी।

संध्या अर्घ्य के बाद, अब सभी व्रती और श्रद्धालु मंगलवार की सुबह उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के लिए तैयार हैं। सूर्योदय के समय अर्घ्य देने के साथ ही इस महापर्व का विधिवत समापन होगा, जिसके बाद व्रती अपना 36 घंटे का निर्जला व्रत तोड़ेंगे। यह पर्व परिवार की सुख-समृद्धि और संतान के कल्याण के लिए मनाया जाता है।