दीपावली से छठ तक ताश-सट्टे का जाल बिछा, परंपरा की आड़ में फल-फूल रहा अवैध जुआ ,कानून और प्रशासनिक सख्ती पर उठे सवाल,चुनिंदा जगहों पर शहर से लेकर गांव तक होता हें खेल ,एक नंबरी लॉटरी की बल्ले बल्ले।
दीपावली से छठ तक ताश-सट्टे का जाल बिछा, परंपरा की आड़ में फल-फूल रहा अवैध जुआ ,कानून और प्रशासनिक सख्ती पर उठे सवाल,चुनिंदा जगहों पर शहर से लेकर गांव तक होता हें खेल ,एक नंबरी लॉटरी की बल्ले बल्ले।
दीपावली से छठ तक ताश-सट्टे का जाल बिछा, परंपरा की आड़ में फल-फूल रहा अवैध जुआ ,कानून और प्रशासनिक सख्ती पर उठे सवाल,चुनिंदा जगहों पर शहर से लेकर गांव तक होता हें खेल ,एक नंबरी लॉटरी की बल्ले बल्ले।
दस्तक 7मीडिया ,दरभंगा /संजय कुमार राय
दीपावली और छठ महापर्व के बीच का समय मिथिलांचल में उत्सव और उमंग का प्रतीक माना जाता है, परंतु इसी अवधि में एक काली परंपरा भी तेजी से पैर पसार रही है—जुआ और सट्टेबाजी का खेल। कभी इसे देवी लक्ष्मी की कृपा पाने की पारंपरिक मान्यता से जोड़ा जाता था, लेकिन अब यह परंपरा अपराध के जाल में बदलती जा रही है।इसका एक बानगी एक नंबरी लॉटरी भी हें जो नगर थाना ,कोतवाली थाना ,विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र के कई जगहों पर खेला जाता हें।
दिवाली और छठ तक चलता है जुए का दौर
शरद पूर्णिमा से शुरू होकर छठ महापर्व तक दरभंगा शहर और आसपास के गांवों में जुआ खेलने का सिलसिला चरम पर रहता है। दीपावली की रोशनी के बीच कई घरों, दुकानों और गली-मोहल्लों में रातभर ताश के पत्ते फड़फड़ाते नजर आते हैं। स्थानीय लोग इसे “लक्ष्मी पूजा की परंपरा” मानते हैं, लेकिन यह मनोरंजन अब आर्थिक नुकसान और सामाजिक तनाव का कारण बन गया है।
दरभंगा के कई इलाकों में सक्रिय जुआ अड्डे
गंगासागर, भटियारिसराय, दिग्घी पश्चिम मोहल्ला, मंदिर चौक, भिगो मोहल्ला, बेला, टावर चौक, गुदरी, मदारपुर और मोगलपुरा जैसे इलाकों में हर रात जुआ और सट्टेबाजी के अड्डे सक्रिय हैं। कुछ स्थानों पर अस्थायी “जुआ घर” तक बना दिए गए हैं, जहां हर रात हजारों-लाखों रुपये का दांव लगता है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि पुलिस गश्त के बावजूद ऐसी गतिविधियां लगातार जारी हैं। “त्योहार के नाम पर जो हो रहा है, वह समाज के माहौल को बिगाड़ रहा है,” एक बुजुर्ग नागरिक ने बताया।
सामाजिक संतुलन बिगाड़ रही यह प्रवृत्ति
सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि जुआ अब सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि अपराध की जड़ बन चुका है। हारने के बाद लोग कर्ज में डूब रहे हैं, परिवारों में कलह बढ़ रही है और झगड़े-चोरी जैसी घटनाएं आम हो गई हैं। सामाजिक कार्यकर्ता अनिल मिश्र ने कहा—“त्योहारों की पवित्रता को दूषित करने वाली यह प्रवृत्ति समाज के नैतिक ताने-बाने को कमजोर कर रही है। इसे रोकना समय की मांग है।”
प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग
स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन और पुलिस से मांग की है कि दीपावली से छठ तक विशेष निगरानी अभियान चलाया जाए और जुआ अड्डों पर त्वरित कार्रवाई हो। पुलिस सूत्रों के अनुसार, कुछ संवेदनशील इलाकों की पहचान की जा चुकी है और वहां गश्त बढ़ाने की तैयारी की जा रही है।
समाज और प्रशासन दोनों की जिम्मेदारी
त्योहारों की आड़ में बढ़ता यह अवैध खेल न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि समाज की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान को भी आघात पहुंचा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रशासनिक सख्ती के साथ-साथ नागरिकों की जागरूकता ही इस अपराधी परंपरा को समाप्त कर सकती है।