सुहागिनों ने रखा निर्जल व्रत, नव विवाहिताओ में दिखा खासा उत्साह
सुहागिनों ने रखा निर्जल व्रत, नव विवाहिताओ में दिखा खासा उत्साह
सुहागिनों ने रखा निर्जल व्रत, नव विवाहिताओ में दिखा खासा उत्साह
दस्तक 7मीडिया ,दीपक कुमार। गायघाट
पति की दीर्घायु, समृद्ध और मंगलमय जीवन के लिए सुहागिन महिलाओं ने शुक्रवार को निराजल करवा चौथ का व्रत रखा। इसकी तैयारी कई दिनों से चल रही है। देर रात तक हाथ में मेहंदी रचवाने, पूजन सामग्री खरीदने का दौर चलता रहा।
महिलाएं शाम को सोलह श्रृंगार करने के बाद चंद्र दर्शन कर चलनी से पति का दीदार करने के बाद पति के हाथ से जल ग्रहण करेंगी। दांपत्य जीवन में अटूट विश्वास और प्रेम के प्रतीक करवा चौथ का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। दिन ब्यूटी पार्लर में दिन भर भीड़ लगी रही। सौंदर्य प्रसाधान के सामानों की जमकर खरीदारी की गई। चंद्र देव का दर्शन शाम को 7:58 है। इसकी तैयारी दिन भर चलती रही।
ड्रेस मैचिंग को लेकर खूब दिखा क्रेज
शहर में इस बार करवाचौथ पर महिलाएं ज्वैलरी के साथ मैचिंग लुक में डूबी दिखीं। जिस भी तरह का लहंगा, साड़ी पहनना है उसी रंग के ज्वैलरी भी पहने दिखीं। साथ ही मैचिंग में चूड़ी और जयपुरिया चूड़ा भी शामिल रहा।
हर उम्र में दिखा उल्लास
नव विवाहिताएं हो या फिर उम्रदराज सभी ने अपने पति की दीर्घायु की कामना की। महिलाओ सजने का काम सूरज ढलने से ही शुरू कर दिया था। सजना के लिए सजने में कोई कसर नहीं छोडी गई। इसमें पतियों का भी काफी सहयोग रहा।
खूब बिके करवे व कैलेंडर
करवा चौथ पर पूजन में प्रयुक्त होने वाली वस्तुओं की शुक्रवार को बिक्री हुई। जगह जगह रंगबिरंगे मिट्टी के करवा की दुकान लगी हुई थी। कैलेंडर, शीक, चावल का पोहा, पेठा की बिक्री हुई। बर्तनों की दुकानों पर स्टील और पीतल के करवे सजाए गए थे। मिट्टी के करवे भी खूब खरीदे गए।
हाथों में रचाई पिया के नाम की मेहंदी
महिलाएं बृहस्पतिवार देर शाम तक करवा चौथ की तैयारियों में जुटी रहीं। किसी ने पिया के नाम तो किसी ने दूल्हा-दुल्हन की छाप वाली मेहंदी रचाई। गुजराती, राजस्थानी छाप से लेकर पूर्वी लोक भावों की एक से बढ़कर एक मेहंदी की डिजाइन बाजार में हैं। सिविल लाइंस स्थित मेहंदी डिजाइनर आकाश सिंह ने बताया कि दूल्हा-दुल्हन वाली डिजाइन के साथ ही बेल, मोर, अरेबिक, फुल हैंड फ्लोरल, गुजराती छाप वाली मेहंदी भी महिलाएं लगवा रही हैं। पत्थर गिरजाघर स्थित मेहंदी डिजाइनर पूनम सरोज बताती हैं कि महिलाएं सुबह से ही देर रात तक लाइन में लगकर मेहंदी लगवाईं। इसमें फ्लावर स्टाइल, राजस्थानी, मोर, गोल टीका वाली डिजाइन छायी रही।