दरभंगा जिला के बहेड़ी प्रखंड अंतर्गत निमेठी पंचायत में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) में करोड़ों का गबन, पंचायत प्रतिनिधि, प्रखंड कर्मी और अधिकारियों की मिलीभगत उजागर,लेकिन कारवाई के नाम पर खानापूर्ति।
दरभंगा जिला के बहेड़ी प्रखंड अंतर्गत निमेठी पंचायत में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) में करोड़ों का गबन, पंचायत प्रतिनिधि, प्रखंड कर्मी और अधिकारियों की मिलीभगत उजागर,लेकिन कारवाई के नाम पर खानापूर्ति।
दरभंगा जिला के बहेड़ी प्रखंड अंतर्गत निमेठी पंचायत में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) में करोड़ों का गबन, पंचायत प्रतिनिधि, प्रखंड कर्मी और अधिकारियों की मिलीभगत उजागर,लेकिन कारवाई के नाम पर खानापूर्ति।
दस्तक 7मीडिया ,दरभंगा /
प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण (PMAY-G) का मकसद गरीबों को घर उपलब्ध कराना है, लेकिन बहेड़ी प्रखंड के निमैठी पंचायत में इस योजना को लूट का साधन बना दिया गया। करोड़ों रुपये मृत व्यक्तियों और प्रवासी लोगों के नाम पर पंचायत प्रतिनिधि, मुखिया, उनके परिजन, पंचायत समिति और प्रखंड कार्यालय के कर्मियों ने फर्जी खातों में डालकर गबन कर लिया।
चार वर्षों से चल रही जांच – रिपोर्ट अधूरी
जिला पदाधिकारी दरभंगा के निर्देश पर इस मामले में जांच टीम गठित की गई थी। लेकिन चार साल तक जांच केवल कागजों पर ही चलती रही। सूत्रों के अनुसार, कई वरीय अधिकारी भी गबनकारियों से मिलकर लाखों रुपये लिए। डीएम राजीव रोशन के ट्रांसफर से पहले आनन-फानन में आंशिक रिपोर्ट सौंपी गई।
मुखिया और परिवार के खातों में गया पैसा
सूत्र बताते हैं कि निमैठी पंचायत की मुखिया और उनके पति शशि कुमार सिंह ने अपने व परिजनों के खातों में आवास योजना का पैसा डलवाकर गबन किया।
• सही लाभुक रिंकू देवी, पति राधे श्याम यादव के नाम पर राशि आवंटित हुई थी, लेकिन मुखिया ने अपने खाते में डालकर पैसा हड़प लिया।
• बाद में दबाव बढ़ने पर कुछ राशि लौटाई भी गई, मगर सभी खातों से पैसा वापस नहीं हुआ।
• जांच में यह भी सामने आया कि मुखिया ने 5 फर्जी खातों में पैसा लिया, जिसमें से अभी तक 1 खाते का पैसा वापस नहीं किया गया है।
62 फर्जी भुगतान का खुलासा, पर प्राथमिकी केवल 44 पर
जांच में पाया गया कि 62 लाभुकों के नाम पर पैसा गबन हुआ। लेकिन प्राथमिकी मात्र 44 लोगों पर दर्ज की गई। आश्चर्यजनक रूप से मुखिया का नाम आज तक शामिल नहीं किया गया ,इस गबन में 18 लोंगों का और भी नाम जुड़ना था ॥
प्रखंड कार्यालय से गायब अभिलेख
योजना के भुगतान के लिए जो “अभिलेख” (जमीन का कागज, आधार, जॉब कार्ड, बैंक खाता, एफिडेविट इत्यादि) तैयार होना अनिवार्य है, वह अभिलेख भी गायब कर दिए गए। जब व्यवहार न्यायालय ने 28 अभियुक्तों की बेल रिजेक्ट की, तब पीठासीन न्यायाधीश ने टिप्पणी की –
“सरकारी कर्मचारी और अधिकारियों की मिलीभगत के बिना इतना बड़ा गबन संभव ही नहीं।”
पुलिस की ढिलाई पर उठे सवाल
पीड़ित पक्ष का आरोप है कि बहेड़ी थाना पुलिस इस पूरे मामले को दबाने में जुटी है।
• पहले यह कहा गया कि मुखिया को पहले ही जेल भेजा जा चुका है, जबकि हकीकत में यह मामला उनके पति पर दर्ज था।
• 2021 में दर्ज हुए कांड संख्या 54/21 में भी दो साल तक गिरफ्तारी नहीं हुई और बाद में आसानी से बेल हो गया।
• पुलिस अधिकारियों पर गबनकारियों के दबाव और धनबल के कारण कार्रवाई न करने का आरोप भी लगा है।
जिला स्तर के अधिकारी भी संदेह के घेरे में
पूर्व डीएम त्यागराजन और पूर्व डीडीसी तनय सुल्तानिया के कार्यकाल में हुई जांच की संचिकाएं तक उप विकास आयुक्त कार्यालय से गायब पाई गईं। वर्तमान में भी कई कागजात “ठंडे बस्ते” में पड़े हुए हैं।
अब भी हो रही हें निष्पक्ष जांच की मांग
पीड़ितों और जागरूक नागरिकों का कहना है कि यदि पुलिस और जिला प्रशासन निष्पक्ष रूप से जांच करें, तो पंचायत से लेकर प्रखंड और जिला स्तर तक कई बड़े अधिकारी और प्रतिनिधि इस घोटाले में फंसेंगे,और गबन कारियों के मिलीभगत का पर्दा उठेगा।