22 साल बाद निकला भव्य जुलूस, बिरौल-घनश्यामपुर सीमावर्ती सुपौल हाटगाछी में हुआ मां दुर्गा की प्रतिमा का ऐतिहासिक विसर्जन,
22 साल बाद निकला भव्य जुलूस, बिरौल-घनश्यामपुर सीमावर्ती सुपौल हाटगाछी में हुआ मां दुर्गा की प्रतिमा का ऐतिहासिक विसर्जन,
22 साल बाद निकला भव्य जुलूस, बिरौल-घनश्यामपुर सीमावर्ती सुपौल हाटगाछी में हुआ मां दुर्गा की प्रतिमा का ऐतिहासिक विसर्जन,
दस्तक7मिडिया, बिरौल, दरभंगा
बिरौल अनुमंडल के अंतर्गत बिरौल और घनश्यामपुर थाना क्षेत्र की सीमा पर स्थित सुपौल हाटगाछी दुर्गा मंदिर में स्थापित मां दुर्गा की अस्थाई प्रतिमा का विसर्जन शुक्रवार को एक भव्य और ऐतिहासिक जुलूस के साथ संपन्न हुआ, जिसने पूरे सुपौल बाज़ार को भक्तिमय कर दिया। स्थानीय लोगों के अनुसार, लगभग 22 वर्षों के अंतराल के बाद यह विसर्जन जुलूस निकाला गया, जिसके चलते इसका महत्व और भव्यता कई गुना बढ़ गई थी। यह अवसर क्षेत्र के लिए एक बार फिर ऐतिहासिक बन गया।
जुलूस का रूट और भक्ति का सैलाब भक्तों का उत्साह चरम पर था और उनके जयकारों से पूरा वातावरण गूंज रहा था। जुलूस हाटगाछी से शुरू होकर नवटोलिया, पुराना थाना चौक, शिवाजी नगर, और मास्टर चौक जैसे प्रमुख मार्गों से होते हुए नगर पंचायत बिरौल में प्रवेश किया। वहां से यह अफजला खेबा, पुल घाट, और सिनेमा रोड से गुज़रते हुए शहीद भगत सिंह स्मारक चौक तक पहुंचा। स्मारक चौक से वापस लौटकर, यह जुलूस उसी मार्ग से होते हुए हाटगाछी पहुंचा, जहां माँ दुर्गा समेत अन्य प्रतिमाओं को तालाब में जल प्रवाह कर दिया गया।
इस दौरान हजारों की संख्या में श्रद्धालु माँ के दर्शन और विदाई के लिए उमड़ पड़े, जिससे सुपौल का यह विसर्जन एक स्मृति चिन्ह बन गया।
सुरक्षा और गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति
इस भव्य और संवेदनशील आयोजन के दौरान कड़ी सुरक्षा व्यवस्था कायम रखी गई थी। एसडीपीओ प्रभाकर तिवारी और दंडाधिकारी सह बीडीओ प्रदीप कुमार झा के नेतृत्व में पुलिस बल तैनात रहा। थानाध्यक्ष चन्द्रमणि, पर्यवेक्षी पुलिस पदाधिकारी अमृत लाल वर्मन, एएसआई राजीव, और एएसआई जितेन्द्र कुमार अपने दल बल के साथ पूरी मुस्तैदी से जुलूस की निगरानी करते रहे।
इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बनने और व्यवस्था संभालने में पूजा समिति के अध्यक्ष मुन्ना मंडल, सनोज नायक, विनोद चौधरी, प्रदीप प्रधान,बैजू मंडल,
पूर्व मुखिया शत्रुघ्न सहनी,के अलावा सुड़ी समाज के सदस्य के साथ-साथ चैती दुर्गा पूजा समिति हाटगाछी के रामचंद्र सहनी, चौधरी सहनी, हरी सहनी सहित क्षेत्र के कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।
22 साल बाद निकले इस भव्य जुलूस ने न केवल सुपौल हाटगाछी की धार्मिक आस्था को पुनर्जीवित किया है, बल्कि सामुदायिक एकता और सांस्कृतिक विरासत को भी मजबूत किया है।