कैमूर के महेसुआ गांव में सीआरपीएफ जवान पप्पू राम का शव जम्मू-कश्मीर से उनके पैतृक घर पहुंचा। जवान की मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई है, जिसके बाद परिजनों ने विभाग पर जानकारी छिपाने का आरोप लगाया है। गांव में शव पहुंचते ही ।
पप्पू राम अपने पीछे एक बेटा और दो बेटियां छोड़ गए हैं, जो अभी दूसरी और तीसरी कक्षा में पढ़ते हैं। उनके भरण-पोषण की चिंता में परिजनों ने सरकार से आर्थिक सहयोग और भविष्य की सुरक्षा गारंटी की मांग की है। विभाग को आत्महत्या का शक परिजनों का कहना है कि विभागीय स्तर पर उन्हें अब तक पप्पू राम की मौत का स्पष्ट कारण नहीं बताया गया है। हालांकि, विभाग इसे आत्महत्या बता रहा है, लेकिन परिवार इस बात से सहमत नहीं है।
परिवार का तर्क है कि घटना से ठीक पहले जवान ने अपने घर वालों से फोन पर बात की थी और सब कुछ सामान्य था, जिससे आत्महत्या की बात पर संदेह गहरा रहा है। सीआरपीएफ के जवान नागेंद्र कुमार पाल, जो पास ही के अखलाशपुर गांव के रहने वाले हैं, मृतक का शव गांव तक लेकर आए। उन्होंने भी बताया कि उन्हें मौत के कारण के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है। CRPF जवान पप्पू राम का शव उनके पैतृक घर पहुंचा, जहां उनका अंतिम संस्कार किया गया।
CRPF जवान पप्पू राम का शव उनके पैतृक घर पहुंचा, जहां उनका अंतिम संस्कार किया गया। विभाग पर पारदर्शिता से काम नहीं करने का लगाया आरोप मृतक के जीजा विकल्प कुमार ने इस पूरे मामले को संदिग्ध बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग पारदर्शिता से काम नहीं कर रहा है। विकल्प कुमार ने चेतावनी दी कि यदि विभाग ने स्पष्ट जानकारी नहीं दी, तो वे मानवाधिकार आयोग और मीडिया का सहारा लेकर पूरे मामले को उजागर करेंगे। फिलहाल, पूरा गांव शोक में डूबा है। ग्रामीण सरकार से न केवल मौत के रहस्य से पर्दा उठाने की मांग कर रहे हैं, बल्कि परिवार की देखभाल के लिए पर्याप्त आर्थिक सहायता देने की भी अपील कर रहे हैं।
