एक ऐसा शक्तिपीठ जहां पूरे गांव के लिए एक ही मां ज्वालामुखी भगवती, 30 वर्षों से अन्न-जल त्याग कर सेवा में लिन शंभू बाबा
एक ऐसा शक्तिपीठ जहां पूरे गांव के लिए एक ही मां ज्वालामुखी भगवती, 30 वर्षों से अन्न-जल त्याग कर सेवा में लिन शंभू बाबा
एक ऐसा शक्तिपीठ जहां पूरे गांव के लिए एक ही मां ज्वालामुखी भगवती, 30 वर्षों से अन्न-जल त्याग कर सेवा में लिन शंभू बाबा
दस्तक7मिडिया, अमीत झा, गौड़ा बौराम।
गौड़ा बौराम प्रखंड क्षेत्र के उत्तरी कसरौड़ गांव में मां भगवती ज्वालामुखी मंदिर एक प्रसिद्ध शक्ति धाम है। मिथिलांचल के घर-घर में कुलदेवी या कुल देवता को पूजने का विधान आदिकाल से है,लेकिन उत्तरी कसरौड़ में पूरे गांव के लिए एक ही भगवती है जो मां ज्वालामुखी के नाम से प्रसिद्ध है। यह मंदिर दरभंगा जिला मुख्यालय से लगभग 45 किलोमीटर पुरब में अवस्थित है।यहां देश-विदेश से श्रद्धालु दर्शन और पूजा अर्चना के लिए आते हैं।
मंदिर में शंभू बाबा पिछले 30 वर्षों से अन्न और जल का त्याग कर भगवती की सेवा में लीन हैं,यह भगवती की चमत्कार है। उनके आशीर्वाद के लिए भक्तों की लंबी कतार लगती है। स्थानीय लोगों का मानना है कि शंभू बाबा प्रतिदिन सिमरिया घाट से गंगाजल लाकर मां ज्वालामुखी की पूजा अर्चना करते हैं,यह भी मानना है कि बाबा भक्तों की कष्ट और दुख दूर कर देते हैं और मंदिर में आने वाले भक्तों की मनोकामना पूर्ण होता है।
ग्रामीण रंजीत झा “गुड्डू”, शंकर झा सहित कई लोगों का कहना है कि लगभग 700 वर्ष पूर्व आधारपुर पंचायत के उफ़रौल गांव निवासी बाबा लखतराज पांडे हिमाचल प्रदेश के नगरकोट पहुंचे थे, वहां वे मां ज्वाला की पूजा अर्चना में लीन हो गए। मान्यता है की मां ज्वालामुखी खुश होकर अपने भक्त लखतराज पांडे के साथ दरभंगा के उत्तरी कसरौड़ गांव के सुंदरवन आई और वही ठहरने की इच्छा जताई।बाबा लखतराज पांडे ने इसी सुंदरवन में मां ज्वालामुखी के लिए एक झोपड़ी बनाई जिसे लगभग 50 साल पहले मंदिर का स्वरूप दिया गया।
यह भव्य मंदिर 6 एकड़ भूमि में फैला हुआ है और इनमें तीन भव्य प्रवेश द्वार बना है।मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए उत्तम व्यवस्था के साथ-साथ नाट्य कला मंच,भागवत कथा मंच,शीतल जल,सीसीटीवी कैमरा तथा शांति व्यवस्था के लिए गांव के लोग तत्पर रहते हैं।मां ज्वालामुखी के दर्शन और पूजन के लिए नेपाल,बंगाल, महर्षि,सहरसा जैसे दूरदराज के क्षेत्र से भी भक्तगण आते हैं।