मब्बी थाना का बड़ा मामला, अनुसंधानक की लापरवाही से शराब तस्कर आज़ाद ,जिम्मेदार पुलिस पदाधिकारियों पर उठ रहें हें सवाल ,कहीं बड़ी डील तों नहीं ?अगर डील नहीं हुई तों 90 दिन बीत जाने के बावजूद आरोप पत्र समर्पित क्यूँ नहीं।

दस्तक 7मीडिया ,दरभंगा /संजय कुमार राय 

दरभंगा जिले के मब्बी थाना क्षेत्र से पकड़ी गई भारी मात्रा में शराब का मामला अब सवालों के घेरे में है। पुलिस अनुसंधानक की लापरवाही ने पूरे केस को कमजोर कर दिया, जिससे दो बड़े शराब तस्कर जेल से बाहर आ गए।

जमानत पर छूट गये दोनों शराब तस्कर 

उत्पाद अधिनियम के विशेष न्यायाधीश श्रीराम झा की अदालत ने पाया कि आरोप पत्र नियत समय सीमा के भीतर समर्पित नहीं किया गया। परिणामस्वरूप अदालत ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 167(2) का लाभ देते हुए दोनों काराधीन अभियुक्तों को जमानत पर मुक्त कर दिया।

356 लीटर विदेशी शराब हुये थे बरामद, दो तस्कर भी हुये थे गिरफ्तार

विशेष लोक अभियोजक हरेराम साहू के अनुसार, मब्बी थाना कांड संख्या 85/25 में पुलिस ने 27 जून 2025 को एक ट्रक से 356 लीटर विदेशी शराब बरामद की थी। इस दौरान उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ निवासी सफीक खां और सुपौल के पिपरा थाना क्षेत्र निवासी गणेश कुमार को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।

90 दिन में आरोप पत्र न दाखिल करना बनी बड़ी चूक

नियम के मुताबिक, पुलिस को 90 दिनों के भीतर अनुसंधान पूरा कर आरोप पत्र अदालत में दाखिल करना था। लेकिन अनुसंधानक रविशंकर पांडेय और थानाध्यक्ष रौशन कुमार दोनों ने मामले में गंभीरता नहीं दिखाई। न्यायालय के कई स्मरण के बावजूद आरोप पत्र समय पर दाखिल नहीं हुआ।

कोर्ट का कड़ा रुख, थानाध्यक्ष व अनुसंधानक को शो कॉज

विशेष न्यायाधीश ने दोनों अधिकारियों को 8 अक्टूबर तक स्पष्टीकरण दाखिल करने का आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि क्यों न इस लापरवाही की सूचना दरभंगा एसएसपी को कार्रवाई के लिये भेजा जाय

सवालों के घेरे में पुलिस की भूमिका

अब बड़ा सवाल यह है कि इतनी बड़ी खेप पकड़े जाने के बावजूद आरोप पत्र दाखिल करने में आखिर देरी क्यों हुई? क्या पुलिस और शराब माफियाओं के बीच कोई बड़ी डील हुई, जिसके कारण अनुसंधान ठंडे बस्ते में डाल दिया गया? सूत्रों का कहना है कि भारी-भरकम रकम लेने के कारण आरोप पत्र दाखिल नहीं किया गया।

जिला पुलिस की साख पर सवाल

दरभंगा जैसे संवेदनशील जिले में पुलिस की ऐसी लापरवाही से शराब माफियाओं का हौसला बढ़ना तय है। अगर इसी तरह अनुसंधानक और थानेदार पैसे के लालच में मामले को कमजोर करते रहे तो जिले में शराबबंदी कानून का कोई मतलब ही नहीं रह जाएगा।

मब्बी थानाध्यक्ष ने कहा कि आरोप पत्र कर दिया गया समर्पित ,पर हो गई देरी।

मब्बी थाना अध्यक्ष रोशन कुमार ने कहा कि उन्होंने 24सितंबर को थाना में योगदान दिये थे और 26सितंबर को इस मामले की उन्हें जानकारी हुई।उन्होंने कहा कि इस मामले में देर हो गई लेकिन 90वें दिन आरोप पत्र समर्पित कर दिया गया ?उन्होंने कहा कि तात्कालीन थानाध्यक्ष को इस मामले में संज्ञान लेकर कारवाई कराना था लेकिन भूलवश देरी हो गई होगी।