स्वास्थ्य व्यवस्था की खुली पोल,खाजासराय शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रहा बंद,मरीज लौटे मायूस।

स्वास्थ्य केंद्र बंद,तस्वीरें भेजी गईं,सिविल सर्जन का जवाब सिर्फ ‘ठीक है’क्या लापरवाही पर होगी कार्रवाई?

दस्तक 7 मीडिया दरभंगा /

बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। दरभंगा शहर के बीचोंबीच स्थित खाजासराय शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बुधवार 11:10 बजे तक भी नहीं खुला। स्वास्थ्य केंद्र के बंद दरवाज़े और लटके ताले को देखकर इलाज के लिए पहुंचे मरीज़ों और उनके परिजनों को मायूसी के साथ वापस लौटना पड़ा। स्थानीय लोगों ने बताया कि यह कोई पहली घटना नहीं है। अक्सर इस केंद्र के खुलने में देरी होती है,और कई बार तो पूरे दिन ताला लटका रह जाता है। यह स्थिति तब है जब यह केंद्र शहरी गरीबों,बुजुर्गों और दैनिक मज़दूरों के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं का पहला सहारा है। स्थानीय लोग नाराज़गी जताते हुए बोले,हम गरीब लोग कहां जाएं? प्राइवेट डॉक्टर के पास तो हज़ार-दो हज़ार ले लेता है। हम तो यहीं आते हैं,लेकिन अब यहां भी ताला मिलता है।प्रशासनिक लापरवाही या सिस्टम की नाकामी? जब इस मामले को लेकर दरभंगा सिविल सर्जन से बातचीत की गई तो उन्होंने संक्षिप्त रूप में कहा ठीक है”और आगे कुछ भी स्पष्ट नहीं किया। इसके बाद बंद पड़े स्वास्थ्य केंद्र की तस्वीरें उनके व्हाट्सएप पर भेजी गईं ताकि उन्हें ज़मीनी हकीकत से रूबरू कराया जा सके। अब देखना यह है कि स्वास्थ्य विभाग इस लापरवाही पर कोई संज्ञान लेता है या फिर हमेशा की तरह मामले को नज़रअंदाज़ कर दिया जाएगा। सवाल उठते हैं: जब सरकारी स्वास्थ्य केंद्र ही समय पर नहीं खुलेंगे तो जनता किस पर भरोसा करे? क्या कर्मचारियों की समयबद्ध उपस्थिति की कोई निगरानी नहीं है? क्या सिविल सर्जन का इतना संक्षिप्त जवाब इस गंभीर लापरवाही के लिए पर्याप्त है? दरभंगा जैसे शिक्षित और जागरूक जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं की यह स्थिति चिंताजनक है। स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को चाहिए कि वह इस तरह की घटनाओं पर सख्त कार्रवाई करे और जनता के भरोसे को बनाए रखने के लिए व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करे।