महाराज लक्ष्मीश्वर सिंह कॉलेज में दिनकर जयंती मनाई गई,विद्वानों ने रखे विचार

राष्ट्रकवि दिनकर की कविताओं में बसती है भारत की आत्मा : प्रो. पाठक

दस्तक 7 मीडिया दरभंगा /गुड्डू राज 

महाराज लक्ष्मीश्वर सिंह मेमोरियल कॉलेज, दरभंगा में हिन्दी विभाग की ओर से राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जयंती पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसका विषय था-दिनकर की दृष्टि में भारत और भारतीयता।
मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. प्रभाकर पाठक ने कहा कि दिनकर ने भारत को सिर्फ एक भूगोल नहीं,बल्कि मानवता,सद्भाव और आत्मीयता से जुड़ी एक महान संस्कृति के रूप में देखा। उनके लिए भारतीयता का मतलब है- सभी अच्छे मानवीय मूल्यों का मेल। कार्यक्रम की अध्यक्षता कॉलेज के प्राचार्य डॉ. शंभु कुमार यादव ने की। विशेष अतिथि के रूप में हिन्दी विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. अमरकान्त कुमार ने दिनकर की प्रसिद्ध कविता “किसको नमन करूँ मैं”का जिक्र करते हुए कहा कि दिनकर के मन में भारत की एक ऊँची और आदर्श छवि थी,जिसे वे अपनी रचनाओं के ज़रिए सामने लाते रहे। हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. सतीश कुमार सिंह ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि दिनकर एक ऐसे कवि थे जो क्रांति और ओज के साथ-साथ भारत की ममता और समानता को भी बेहद भावुक होकर व्यक्त करते थे। वे चाहते थे कि भारत की संस्कृति विश्व में शांति और भाईचारे का संदेश दे।मध्यप्रदेश के सीहोर से आए चंद्रशेखर आज़ाद शासकीय पीजी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. रोहिताश्व कुमार शर्मा और डॉ. ज्वाला चंद्र चौधरी ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम की शुरुआत डॉ.संगीता कुमारी द्वारा दिनकर की कविता”शहीद स्तवन” के गायन से हुई। संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. विनय कुमार झा ने स्वस्तिवाचन किया। मंच संचालन डॉ. सुप्रिया शालिनी ने किया और अंत में धन्यवाद ज्ञापन डॉ. संगीता कुमारी ने किया।
इस अवसर पर कॉलेज के कई शिक्षक और विद्वान शामिल हुए,जिनमें डॉ. नन्दकिशोर झा,डॉ.मनोज कुमार वर्मा,डॉ. शतुध्न मिश्रा,डॉ. नरेंद्र नीरज,डॉ. मणिशंकर झा,डॉ. रणवीर कुमार,प्रो. अशोक कुमार,डॉ. सुजीत साफी,डॉ. वंदना कुमारी,डॉ. सरस्वती,डॉ. अनुप्रिया,डॉ. प्रियंका लाल,डॉ. राम प्रभाकर मिश्र और डॉ. आनंद मोहन झा प्रमुख थे।