जनता कोशी महाविद्यालय, बिरौल में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की 117वीं जयंती समारोह सम्पन्न
जनता कोशी महाविद्यालय, बिरौल में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की 117वीं जयंती समारोह सम्पन्न
जनता कोशी महाविद्यालय, बिरौल में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की 117वीं जयंती समारोह सम्पन्न
दस्तक7मिडिया, बिरौल, दरभंगा।
जनता कोशी महाविद्यालय, बिरौल में आज राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की 117वीं जयंती साहित्यिक गरिमा और अकादमिक गंभीरता के साथ मनायी गयी। इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो० सूर्यनारायण पांडेय ने की तथा आयोजन का दायित्व हिन्दी विभाग ने संभाला। मंच संचालन का दायित्व डॉ० शम्भु पासवान (प्राध्यापक, हिन्दी विभाग एवं NSS ऑफिसर) ने निभाया।
बीज वक्तव्य प्रस्तुत करते हुए डॉ० राम शेख पंडित (विभागाध्यक्ष, हिन्दी विभाग) ने दिनकर जी के साहित्य की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि- “युद्ध नहीं जिनके जीवन में, वे भी बड़े अभागे होंगे। या तो प्रण को तोड़ा होगा या फिर रण से भागे होंगें”
उन्होंने रश्मिरथी का उल्लेख करते हुए कहा कि दिनकर जी ने केवल वीरता और पराक्रम का गान ही नहीं किया, बल्कि समाज में फैली जातिगत संकीर्णताओं और अन्याय पर भी प्रखर स्वर उठाया। रश्मिरथी में कर्ण के माध्यम से उन्होंने दिखाया कि प्रतिभा और पराक्रम जाति-बंधन में नहीं बंधे होते। इस दृष्टि से दिनकर का काव्य आज भी सामाजिक न्याय और समानता का प्रखर दस्तावेज़ है।
कार्यक्रम में क्रमशः डॉ० आबिद करीम (उर्दू विभाग) ने दिनकर की मत्त्वपूर्ण रचना ‘संस्कृति के चार अध्याय पर प्रकाश डाला, डॉ० प्रियंका (दर्शनशास्त्र विभाग), डॉ० शारदा (राजनीति शास्त्र विभाग), डॉ० आरती (जूलॉजी विभाग), डॉ०अनुजा एवं डॉ० राधा ने अपने विचार व्यक्त किए और दिनकर जी की साहित्यिक, सामाजिक एवं राष्ट्रवादी दृष्टि की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।