बिरौल

“कभी खुशी कभी गम “इस फिल्म को आपने जरूर देखा होगा ,या फिर गाने सुने होंगे। इस शब्द का सार हमारी जिंदगी से भी जुड़ा हैं ,और हमारे जीवन में कई पल ऐसे आते जाते रहते हैं।कभी कभी तो यह पल अचानक आते हैं जो सोचने पर मजबूर कर देता हैं।
ऐसा ही कल एक वाकया सामने आया हैं। यह वाकया बिरौल अनुमंडल के अनुमंडलाधिकारी से जुड़ा हुआ हैं।
इधर पटना से आये न्यायाधीश बिरौल अनुमंडल में व्यवहार न्यायालय का उदघाटन कर वापस हो गये उधर भवन उदघाटन के बाद ही बिरौल के अनुमंडलाधिकारी को आवासीय सरकारी भवन मिला। फिर क्या था ,नई जोश नये उमंग के साथ उन्होंने नये घर का उद्घाटन करते हुये अनुमंडल के सभी पदाधिकारी एवं गणमान्य लोंगों को खाने का निमंत्रण दें दिया। लोग पहुंच रहें थे ,कुछ लोग खाना खा रहें थे। खुशी का माहोल था। हंसी मजाक हो रहा था।
इसी बीच एक सरकारी पत्र निकला जिसमें राज्य के कई एसडीओ को सरकार ने एक जगह से दुसरे जगह स्थानांतरित कर दिया इसमें बिरौल अनुमंडलाधिकारी के स्थानांतरण का जिक्र था। अब यह बात एक दूसरे के बीच चर्चा होने लगी। कई लोग कहने लगे कि अब खाना खाने का मन नहीं हैं ,अच्छा नहीं लग रहा हैं। सभी लोग उदास हो गये। ऐसा होते देख एसडीओ संजीव कुमार कापर ने हंसते हुये कहा कि हम दूर नहीं गये हैं पास में ही हैं। समस्तीपुर जिला हुआ हैं। डीसीएलआर पद पर सरकार ने भेजा हैं।
इस दौरान कई चेहरे पर खुशी के बदले गम में बदल गया था और लोग यह भी कह रहें थे साहब को नया भवन नहीं धारा ?
खैर सरकारी आदेश हैं पालन तो करना ही पड़ेगा। कभी खुशी तो कभी गम होता रहेगा यही तो जीवन का मूल मंत्र भी हैं। उमेश कुमार भारती अब बिरौल के नये एसडीओ बन गये हैं ?