जहानाबाद में एसपी की बड़ी कार्रवाई,जूनियर सिपाहियों को हटाकर वरीय सिपाहियों की होगी विभिन्न कार्यालयों में पोस्टिंग।

दस्तक 7मीडिया /संजय कुमार राय 

पुलिस मुख्यालय के आदेश के आलोक में जहानाबाद के पुलिस अधीक्षक ने कड़ा कदम उठाते हुए जिले के विभिन्न कार्यालयों में तैनात 2021-22 बैच के करीब 45 जूनियर सिपाहियों को उनके पदों से हटाने की बात  कही है। इनकी जगह अब अनुभवी और वरीय सिपाहियों की तैनाती की जा रही है।एसपी ने कहा कि आदेश का शत-प्रतिशत पालन होना चाहिये।

यहां बता दे कि पूरे बिहार में यह पहला जिला है जहां पुलिस मुख्यालय के निर्देश का शत-प्रतिशत पालन हुआ हे , मगध रेंज के आईजी ने भी इस पर संज्ञान लिया।
एसपी द्वारा कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में इस फैसले की चर्चा तेज हो गई है।

क्यों उठाया गया कदम ?

जूनियर सिपाही कार्यालयों में महत्वपूर्ण पदों पर तैनात थे।अनुभव की कमी और जिम्मेदारी के बावजूद अनुशासनहीनता बढ़ने लगी थी, कई मामलों में वरिष्ठ सिपाहियों के साथ दुर्व्यवहार की शिकायतें आती रहती थीं।विभागीय अनुशासन बनाए रखने के लिए यह कदम जरूरी माना गया।

किन कार्यालयों में बदलाव?

एसपी ने निर्देश दिया कि वरीय और प्रशिक्षित सिपाहियों को इन महत्वपूर्ण कार्यालयों में तैनात किया जाए:
• पुलिस अधीक्षक (गोपनीय शाखा)
• अल्पावास गृह
• सीसीटीएनएस
• व्यवहार न्यायालय
• अभियोजन कोषांग
• इलेकान डाटा
• परिवहन शाखा
• जन कोषांग
• महिला हेल्प डेस्क
• मद्य निषेध कोषांग
• अवकाश शाखा समेत अन्य

चयन की प्रक्रिया

• वरीय बैच के वे सिपाही जो हिन्दी टंकण जानते हैं, उन्हें साक्षात्कार के बाद पदस्थापित किया जाएगा।
• इस संबंध में पुलिस उपाधीक्षक (रक्षित) और संबंधित शाखाओं को निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

कई सिपाही करते हे वरीय पुलिस पदाधिकारियों के लिये दलाली 

 

कई ऐसे मुख्यालय के आदेश हे जिसका सख्ती से पालन डीआईजी /आईजी /एसएसपी /एसपी नहीं कर रहें हे।कई जिले ऐसे हे जहां वर्षों से सिपाही जमे हे जबकि इनका स्थानांतरण मुख्यालय से हो गया हे बावजूद अभी भी कई जिलों में जमे हे।ऐसे सिपाहियों का एसपी से लेकर डीआईजी तक गहरी पैठ हे ,यू कहा जाय तों विभाग के अनुशासन का पालन करना या कराना ऐसा लगता हे कि इन अधिकारियों के जिम्मे नहीं हे इस कारण भी पुलिस विभाग में अराजकता का माहौल हे ,जिसे दुरुस्त करना वरीय पुलिस पदाधिकारियों की जिम्मेदारी हे,लेकिन कागजों पर इनका स्थानांतरण तों हो जाता हे लेकिन कुछ ही दिनों में फिर से इनका समायोजन कर दिया जाता हे ,जो पुलिस विभाग के लिये खतरे की घंटी हे।चर्चा हे कि ऐसे सिपाही वरीय पदाधिकारियों के लिये दलाली का काम करते हे।