हिंदी और उर्दू में प्रकाशित हो रही है‘जिला उर्दू नामा’पत्रिका से उर्दू भाषा के प्रचार-प्रसार को मिलेगा बढ़ावा, उर्दू की मिठास पूरी दुनिया में सराही जाती है,उर्दू दिलों को जोड़ने वाली भाषा है: डीएम कौशल कुमार
हिंदी और उर्दू में प्रकाशित हो रही है‘जिला उर्दू नामा’पत्रिका से उर्दू भाषा के प्रचार-प्रसार को मिलेगा बढ़ावा, उर्दू की मिठास पूरी दुनिया में सराही जाती है,उर्दू दिलों को जोड़ने वाली भाषा है: डीएम कौशल कुमार
हिंदी और उर्दू में प्रकाशित हो रही है‘जिला उर्दू नामा’पत्रिका से उर्दू भाषा के प्रचार-प्रसार को मिलेगा बढ़ावा,
उर्दू की मिठास पूरी दुनिया में सराही जाती है,उर्दू दिलों को जोड़ने वाली भाषा है: डीएम कौशल कुमार
दस्तक 7मीडिया ,दरभंगा /गुड्डु राज
दस्तक 7 मीडिया दरभंगा : बिहार सरकार के उर्दू निदेशालय मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग बिहार पटना के निर्देश पर दरभंगा समाहरणालय स्थित जिला उर्दू भाषा कोषांग द्वारा वर्ष 2025-26 के लिए ‘जिला उर्दू नामा’ पत्रिका का प्रकाशन किया जा रहा है। यह पत्रिका हिंदी और उर्दू दोनों भाषाओं में प्रकाशित की जा रही है,जिसका उद्देश्य उर्दू को बतौर द्वितीय राजभाषा बढ़ावा देना है। विदित हो कि उर्दू बिहार की द्वितीय राजभाषा है और इसे प्रेम,भाईचारे और गंगा-जमुनी तहज़ीब की भाषा माना जाता है। इस पत्रिका में स्थानीय लेखकों,शायरों और उर्दू साहित्यकारों की रचनाएं शामिल की गई हैं। जिला प्रशासन के कई अधिकारियों ने अपनी शुभकामनाएं दी हैं और इसके प्रकाशन को एक सकारात्मक और जरूरी पहल बताया है। जिला अनुवादक डॉ. जसिमुद्दीन ने बताया कि यह पत्रिका हर साल प्रकाशित होती है,जिसमें दरभंगा के उर्दू साहित्यकारों की रचनाएं,कविताएं और लेख शामिल होते हैं। पत्रिका का विमोचन जल्द ही उर्दू फ़रोगे उर्दू सेमिनार के दौरान जिला पदाधिकारी के करकमलों द्वारा किया जाएगा। जिला पदाधिकारी कौशल कुमार ने अपने शुभकामना संदेश में कहा कि उर्दू भाषा दिलों को जोड़ने वाली भाषा है,इसकी मिठास और साहित्यिक परंपरा पूरी दुनिया में सराही जाती है। जिला उर्दू नामा न सिर्फ साहित्यिक मंच है,बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों को उर्दू की अहमियत समझाने का एक जरिया भी है। अपर समाहर्ता सलीम अख्तर ने कहा कि यह पत्रिका न सिर्फ उर्दू साहित्य को दर्शाती है,बल्कि उर्दू प्रेमियों को मंच भी देती है। उन्होंने कहा कि उर्दू भाषा की मधुरता और अभिव्यक्ति की खूबसूरती लोगों के दिलों को छूती है।
उप विकास आयुक्त स्वप्निल कुमार ने बताया कि पत्रिका में प्रख्यात उर्दू लेखकों की रचनाएं शामिल की गई हैं,जो पाठकों को दरभंगा की सांस्कृतिक और भौगोलिक धरोहर से भी परिचित कराएंगी। जिला जनसंपर्क कार्यालय के उप निदेशक ने कहा कि उर्दू भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल है,और इसके विकास के लिए समाज के हर वर्ग को मिलकर प्रयास करना चाहिए। जिला उर्दू भाषा कोषांग के प्रभारी पदाधिकारी आनंद कुमार ने जानकारी दी कि यह पत्रिका हर साल प्रकाशित की जाती है,और इससे स्थानीय लेखकों को पहचान और मंच दोनों मिलता है। अपर समाहर्ता मनोज कुमार ने कहा कि उर्दू भाषा हिंदू-मुस्लिम एकता की प्रतीक है और यह भारत में ही जन्मी तथा विकसित हुई है। उन्होंने बताया कि जब भारत में ब्रिटिश शासन शुरू हुआ था,तब उर्दू को राजभाषा का दर्जा प्राप्त था। मीर,गालिब,एकबाल जैसे महान शायरों के साथ-साथ प्रेमचंद,कृष्ण चंदर और फिराक गोरखपुरी जैसे हिंदी लेखकों ने भी उर्दू साहित्य को समृद्ध किया है। उन्होंने कहा कि ‘जिला उर्दू नामा’ का प्रकाशन दरभंगा की साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का कार्य कर रहा है और इसके लिए उन्होंने उर्दू भाषा कोषांग की टीम को बधाई दी। वहीं जिला स्थापना उपसमाहर्ता अमृता कुमारी ने कहा कि उर्दू मेल-जोल,प्रेम और भाईचारे की भाषा है। यह भाषा गंगा-जमुनी तहज़ीब का आदर्श उदाहरण है,जो भारत की विविधता में एकता को दर्शाती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि ‘जिला उर्दू नामा’ के जरिए उर्दू भाषा को नई पीढ़ी तक पहुँचाने में मदद मिलेगी।