बिहार में नशे के खिलाफ ऐतिहासिक कदम,

“मद्यनिषेध एवं राज्य स्वापक नियंत्रण ब्यूरो” का गठन, 339 पदों की मंजूरी,चुनावी साल में सरकार का बड़ा दांव

दस्तक 7मीडिया ,पटना 

बिहार में शराबबंदी और ड्रग्स के बढ़ते नेटवर्क पर शिकंजा कसने के लिए सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा कदम उठाया है। गृह विभाग ने विशेष इकाई “मद्यनिषेध एवं राज्य स्वापक नियंत्रण ब्यूरो” के गठन को हरी झंडी दे दी है।

क्यों जरूरी था नया ब्यूरो?

• शराबबंदी कानून लागू होने के बावजूद अवैध तस्करी पर रोक नहीं।
• मादक पदार्थ और ड्रग्स का कारोबार तेजी से फैला।
• संगठित गिरोहों का नेटवर्क राज्य की सीमाओं से बाहर तक सक्रिय।
• परंपरागत पुलिसिंग नाकाफी साबित।

संरचना और ताक़त

• कुल पद : 339
• पहले से स्वीकृत : 229
• नये सृजित : 100
• वरिष्ठ पद
• एडीजी/आईजी – 01
• डीआईजी – 01
• एसपी – 02
• शेष पद पर अन्य अधिकारी और कर्मी।

पूरे बिहार में कार्रवाई का अधिकार

• ब्यूरो के अधीन राज्य स्तरीय मद्यनिषेध एवं नारकोटिक्स थाना बनेगा।
• यह थाना पूरे राज्य में नशीले पदार्थों और शराब से जुड़े अपराधों पर कार्रवाई करेगा।
• एडीजी/आईजी किसी भी जिले का केस सीधे अपने हाथ में ले सकेंगे।
• गृह विभाग और डीजीपी भी मामले ब्यूरो को सौंप सकेंगे।

असर और उम्मीदें

• संगठित अपराधियों के नेटवर्क पर सीधी चोट।
• सूचना संकलन और तकनीकी निगरानी से मजबूत कार्रवाई।
• शराब व ड्रग्स तस्करी दोनों पर एक साथ प्रहार।
• नशामुक्त बिहार अभियान को नई धार।

सरकार ने चुनावी साल में नशा माफियाओं पर करारा प्रहार करने के लिए एक विशेष हथियार तैयार कर लिया है।