तर्पण करते श्रद्धालु। भदोही जनपद के नारेपार स्थित सीतामढ़ी महर्षि वाल्मीकि आश्रम में मातृ नवमी पर विशेष श्राद्ध कार्यक्रम का आयोजन किया गया। वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ गंगा घाट पर श्रद्धालुओं ने तर्पण किया। वैदिक पंचांग के अनुसार, 15 सितंबर सोमवार को मातृ नवमी मनाई गई। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन उन माताओं, बहनों और बेटियों का तर्पण किया जाता है, जिनका निधन पति के जीवित रहते हुआ हो या जिनकी पुण्यतिथि का ज्ञान न हो। हिंदू धर्म में पितृपक्ष को विशेष महत्व दिया जाता है।
यह समय पूर्वजों की आत्मा की शांति और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए माना जाता है। पितृपक्ष की नवमी तिथि को मातृ नवमी के रूप में मनाया जाता है। कार्यक्रम में लालमनी मिश्रा, राजेश मिश्रा सीकरहा, अनिल मिश्र, अमन मिश्र और नितिन मिश्र सीकरहा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से श्राद्ध कर्म संपन्न किया। महेश्वर प्रसाद शास्त्री ने मातृ नवमी श्राद्ध की महत्ता और विधि के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
