बिहार को मिलेगी बिजली की नई ताक़त

यह पावर प्लांट राज्य का अब तक का सबसे बड़ा बिजली उत्पादन केंद्र होगा. इसमें कुल तीन यूनिट होंगी, और हर यूनिट से 800 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जाएगा. इस तरह कुल क्षमता 2400 मेगावाट की होगी, जो बिहार की ऊर्जा जरूरतों को काफी हद तक पूरा कर सकेगी.

29 हजार करोड़ की लागत

इस विशाल परियोजना का निर्माण अडानी पावर द्वारा किया जाएगा, जिसकी अनुमानित लागत करीब 29,000 करोड़ रुपये है. ऊर्जा विभाग के अनुसार, 15 अक्टूबर 2025 से निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा और लक्ष्य है कि तीन वर्षों में पहली यूनिट से बिजली उत्पादन आरंभ हो जाए.

शिलान्यास कार्यक्रम में दिखा जोश और गर्व

पीरपैंती के निर्माण स्थल पर हुए शिलान्यास कार्यक्रम में हजारों लोगों की भीड़ उमड़ी. कार्यक्रम में ऊर्जा विभाग के सचिव मनोज कुमार सिंह, भागलपुर के कमिश्नर, जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी, स्थानीय सांसद और विधायक सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे. इस मौके पर स्थानीय विधायक ललन पासवान भावुक हो गए और अपनी मिट्टी को सिर पर लगाकर सम्मान प्रकट किया.

संपन्न संसाधनों वाली ज़मीन पर बनेगा पावर हब

पीरपैंती को इस परियोजना के लिए रणनीतिक रूप से उपयुक्त माना गया है. यहां नजदीक ही राजमहल कोल माइंस स्थित हैं, जिससे कोयले की आपूर्ति में कोई दिक्कत नहीं होगी. साथ ही गंगा नदी के कारण पानी की भी भरपूर उपलब्धता रहेगी.

भूमि अधिग्रहण लगभग पूरा

इस पावर प्लांट के लिए कुल 990 एकड़ जमीन अधिग्रहित की गई है, जिसमें से 919 एकड़ निजी, 112 एकड़ राज्य और 85 एकड़ केंद्र सरकार की जमीन है. अब तक 96% भूमि मालिकों को मुआवजा दिया जा चुका है, जिससे परियोजना को समय पर शुरू करने में मदद मिल रही है.

रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे

परियोजना के संचालन से स्थानीय युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार मिलेगा. निर्माण के दौरान हजारों मजदूर और तकनीकी कर्मचारियों की जरूरत होगी, वहीं परियोजना के पूर्ण रूप से चालू होने के बाद लगभग 12,000 लोगों को स्थायी रोजगार मिल सकता है.