जाले में प्राकृतिक खेती का 5-दिवसीय प्रशिक्षण सम्पन्न, 20 कृषि सखियों को मिला प्रमाणपत्र
जाले में प्राकृतिक खेती का 5-दिवसीय प्रशिक्षण सम्पन्न, 20 कृषि सखियों को मिला प्रमाणपत्र
जाले में प्राकृतिक खेती का 5-दिवसीय प्रशिक्षण सम्पन्न, 20 कृषि सखियों को मिला प्रमाणपत्र
दस्तक 7मीडिया ,दरभंगा/
कृषि विज्ञान केंद्र, जाले में शुक्रवार को प्राकृतिक खेती विषय पर आयोजित 5-दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। दरभंगा जिले के 10 प्रखंडों से आईं 20 कृषि सखियों ने प्रशिक्षण पूरा कर प्रमाणपत्र प्राप्त किया।
प्रशिक्षण का नेतृत्व केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. दिव्यांशु शेखर ने किया। उन्होंने रासायनिक खेती से मानव स्वास्थ्य और मिट्टी की उर्वरा शक्ति पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को विस्तार से समझाते हुए प्राकृतिक खेती अपनाने पर बल दिया।
प्रशिक्षण में डॉ. मुकेश कुमार (सहायक शोध निदेशक, डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा) ने कृषि सखियों को जीवामृत, बीजामृत, नीमास्त्र, ब्रह्मास्त्र, फफूंदनाशक जैसी प्राकृतिक विधियों की प्रयोगात्मक जानकारी दी।
डॉ. मनोज कुमार (सहायक प्राध्यापक, कीट विज्ञान) ने नीमास्त्र, ब्रह्मास्त्र एवं दसपर्णी अर्क बनाने और उनके उपयोग की विधि बताई।
डॉ. आशीष राय (मृदा विज्ञान विशेषज्ञ) ने प्राकृतिक खेती के सिद्धांतों और उसके लाभों पर प्रकाश डाला।
डॉ. सच्चिदानंद एवं डॉ. मनोहर पंजीकर (कृषि विज्ञान केंद्र, सीतामढ़ी) ने अनाज व उद्यानिकी फसलों में प्राकृतिक पद्धति अपनाने की जानकारी दी।
डॉ. चन्दन कुमार ने केंद्र में चल रहे प्राकृतिक खेती के प्रायोगिक खेतों (धान, हल्दी, भिंडी आदि) का भ्रमण कराया।
समापन मौके पर कृषि सखियों ने प्राकृतिक खेती के महत्व पर अपने विचार साझा किए और भविष्य में इसे अपनाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में डॉ. प्रदीप कुमार विश्वकर्मा (उद्यान विशेषज्ञ), डॉ. पूजा कुमारी (गृह विज्ञान विशेषज्ञ) और इंजी. निधि कुमारी (मृदा–जल संरक्षण विशेषज्ञ) की भी सक्रिय भागीदारी रही।