एक सिपाही ,सब पर भारी ?कुछ तों बात हे मधुबनी जिला में तैनात चर्चित सिपाही हरि ॐ शरणम और विकास में।अब तों मधुबनी जिला के आला पुलिस पदाधिकारियों पर उठ रहे सवाल,सवाल यही कि कैसे वर्षों से जमे हे पुलिसकर्मी, मुख्यालय के आदेश को भी दिखा देते हे ठेंगा।

दस्तक 7मीडिया /संजय कुमार राय 

मधुबनी जिले की पुलिसिंग इन दिनों गंभीर सवालों के घेरे में है। जिला बल में ऐसे कई पुलिसकर्मी और पदाधिकारी हैं जो वर्षों से एक ही जगह पर जमे हुए हैं। मुख्यालय स्तर से बार-बार स्थानांतरण आदेश जारी होने के बावजूद इनपर कोई असर नहीं पड़ता। वजह सबको मालूम है, लेकिन कार्रवाई जिला स्तर पर अटक जाती है।

सूत्रों का कहना है कि जिले में एक खास धंधा चल रहा है। यह धंधा मधुबनी जिला के सभी पुलिसकर्मियों के जुबान पर हे ,अप्रत्यक्ष रूप से कहते हे कि मामला कोई भी हो ,जिले के हर कामों का निपटारा यही से हे और जब “लक्ष्मी बरसती” है तो पुलिस पदाधिकारियों के बीच पैसों की बंदरबांट शुरू हो जाती है। इसका सीधा असर पुलिसिंग के कार्यशैली पर पड़ता है। कई थानों में फरियादियों की समस्याओं के समाधान की जगह केवल लेन-देन की बातें हावी रहती हैं।इस जिले के पुलिसकर्मी /पदाधिकारी जब तक हरि ॐ के शरण में नहीं जाएंगे तब तक उनका विकास नहीं होगा।

मधुबनी जिले का दरभंगा से तुलना करे तों बड़ा फर्क 

जहाँ एक ओर दरभंगा जिले में वरीय पुलिस अधीक्षक जगन्नाथ रेड्डी जला रेड्डी की सख्त कार्रवाई से  महज डेढ़ सालों में अब तक करीब 65 पुलिसकर्मी और पदाधिकारियों पर गाज गिर चुकी है, वहीं मधुबनी में हालात बिल्कुल पलट हैं।
• दरभंगा एसएसपी “लापरवाह थानाध्यक्ष” पर कार्रवाई करने में एक पल की भी देरी नहीं करते।
• किसी शिकायत पर त्वरित जांच होती है और जांचोपरांत कार्रवाई भी तय है।

ठीक इसके विपरीत, मधुबनी में अधिकतर मामलों में केवल “कागजी खेल” दिखता है। बड़े मामलों में भी महज स्पष्टीकरण लेकर क्लीन चिट दे दी जाती है। थानाध्यक्ष पर कार्रवाई लगभग नदारद है

हरि ॐ शरणम और विकास का दबदबा,

जिले के पुलिसकर्मियों के बीच चर्चा का सबसे बड़ा विषय दो नाम हैं – हरि ॐ और उसका सहयोगी विकास।
• बताया जाता है कि इन दोनों का इतना दबदबा है कि मुख्यालय के आदेश भी इनके सामने बेमानी हो जाते हैं।
• 12–13 साल से ये दोनों मधुबनी जिले में ही जमे हुए हैं।
हाल ही में मुख्यालय के स्थानांतरण /पदस्थापन सूची में इनका नाम शामिल था, लेकिन इसके बावजूद स्थानांतरण नहीं हुआ।

इस स्थिति के कारण पुलिसकर्मियों के बीच आक्रोश पनप रहा हे । दबे स्वर में कई पुलिसकर्मी कहते हैं कि यदि मुख्यालय स्तर पर हरि ॐ शरणम के सम्पति की जांच कराई जाए तो बीते सालों में अर्जित अकूत संपत्ति की परत-दर-परत खुलकर सामने आ जाएगी।

मुख्यालय तक पहुंच सकता है मामला

मधुबनी जिला पुलिस बल में simmering (सुलगता) आक्रोश अब खुलकर सामने आने लगा है।
कई पुलिसकर्मी मानते हैं कि यह मामला जल्द ही मुख्यालय तक पहुंचेगा।
जैसे वैशाली जिले के पुलिसकर्मियों ने सामूहिक रूप से डीजीपी को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की थी, वैसा ही कदम मधुबनी पुलिसकर्मी भी उठा सकते हैं।
आरोप यह भी है कि पूर्व में मुख्यालय स्तर से स्थानांतरण होने के बावजूद वरीय पुलिस अधिकारियों की “कृपा दृष्टि” इनपर विगत कई सालों से बनी हुई हे इसके चलते ये दोनो पुलिसकर्मी इसी जिला बल में  जमे हुये हे।कारण तों स्वतः वरीय पुलिस पदाधिकारी समझ सकते हे।

गंभीर सवाल और जांच की मांग

सबसे बड़ा सवाल यही है कि मुख्यालय के इतने कड़े आदेश के बावजूद स्थानांतरण क्यों नहीं हुआ? आखिर कौन-सा प्रभाव या संरक्षण इनके पीछे काम करता है? क्या इनकी अकूत संपत्ति और ताकतवर पहुँच के चलते ही आदेश ठेंगा दिखा रहे हैं?

स्थानीय पुलिसकर्मियों का मानना है कि निगरानी विभाग या मुख्यालय स्तर से यदि निष्पक्ष जांच हो, तो कई परतें खुलेंगी और जिला पुलिस की कार्यशैली की असलियत सामने आएगी।

यह खबर सीधे तौर पर मधुबनी जिला पुलिस बल की कार्यप्रणाली, वर्षों से जमे अधिकारियों और उन पर मंडराते संदेहों को उजागर करती है।

इस जिला में पदस्थापित किये गये कई थानेदारों के भी किस्से अजब गजब हे जिनकी पोस्टिंग हुई हुई हे ,चाहे वह फुलपरास थाना हो या फिर अन्य  ?ऐसा लगता हे कि थानेदारों की पोस्टिंग से पहले का इतिहास वरीय अधिकारी सेवा पुस्तिका एवं अन्य माध्यम से ना देखते हे ना जानकारी लेते हे ?