पूर्व विधायक हरिनंदन यादव पंचतत्व में विलीन, हजारों लोगों ने नम आंखों से दी अंतिम विदाई

दस्तक 7मीडिया ,हनुमाननगर।


हायाघाट बिधान सभा क्षेत्र के पुर्व विधायक रहे विधायक हरिनंदन यादव का पार्थिव शरीर रविवार की दोपहर करीब 2 बजे उनके पैतृक गांव हनुमाननगर में पंचतत्व में विलीन हो गया। बड़े पुत्र रमेश यादव ने उन्हें मुखाग्नि दी।दाहसंस्कार के समय परिजन, सगे-संबंधी, ग्रामीणों समेत आस-पास के गांवों से आए हजारों लोग नम आंखों से अंतिम यात्रा में शामिल हुए।

मौके राजद के वरिष्ठ नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी, पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री अली अशरफ फातमी,पूर्वमंत्री सह विधायक ललित यादव, मिश्री लाल यादव, महबूब आलम, पूर्व विधायक भोला यादव, ऋषि मिश्रा, पूर्व केंद्रीय मंत्री एम ए ए फातमी, पूर्व विधायक फराज फातमी, राजद जिलाध्यक्ष उदय शंकर यादव, पूर्व मेयर मिट्ठू खेडिया, उदय शंकर चौधरी, प्रमुख संतोष कुमार यादव, दानिश अशरफ, जदयू के पूर्व जिलाध्यक्ष गोपाल मंडल, रमाकांत यादव समेत कई गणमान्य नेता मौजूद रहे। जिला प्रशासन की ओर से सदर अनुमंडल पदाधिकारी स्वप्निल और एसडीपीओ राजीव कुमार प्रतिनिधि के तौर पर उपस्थित थे।तकरीबन 4 बजे पटना से नेता प्रतिपक्ष सह पूर्व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव विधायक स्व. हरिनंदन यादव के आवास पर पहूंचे तथा अपने दिवंगत विधायक के तैलचित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि निवेदित किया।वहीं उनके परिजनों से मिलकर सान्त्वना दी।मौके पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा कि उनके पिताजी लालू प्रसाद यादव जी उन्हें मोक्षवाला कहकर संबोधित किया करते थे।उनसे जुड़े संस्मरण साझा कर तेजस्वी भावूक हो उठे।उन्होंने कहा कि उनके निधन से राजद परिवार मर्माहत है।विदित हो कि पूर्व विधायक हरिनंदन यादव का निधन शनिवार को पटना के एक निजी अस्पताल में हो गया था। वे अपने पीछे दो पुत्र तथा पोते पोतियों से भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं।मध्यमवर्गीय किसान परिवार में जन्मे यादव ने पटोरी उच्च विद्यालय से 12वीं तक की पढ़ाई की थी। वे पहली बार 1995 में जनता दल के टिकट पर हायाघाट से विधायक निर्वाचित हुए थे। पहले ही कार्यकाल में उन्होंने हायाघाट प्रखंड के पश्चिमी हिस्से को अलग कर हनुमाननगर प्रखंड का गठन कराने में सफल रहे, जिसके लिए यहां की 14 पंचायतों के लोग उन्हें हमेशा याद करेंगे।साल 2000 के विधानसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन 2005 में वे दो बार हुए चुनावों में जीत हासिल कर विधायक बने और हनुमाननगर प्रखंड को अंचल का दर्जा दिलवाकर आम जनमानस में अपनी यादगार क्षवि कायम किया।
पूर्व विधायक यादव ने क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या बाढ़ को लेकर कई जनांदोलनों का नेतृत्व किया था और इस क्रम में लोगों के साथ जेल भी गये।
क्षेत्र के चप्पे -चप्पे से आये हजारों लोगों ने विधायक अमर रहे के जयकारे के शवयात्रा निकालकर उनके अन्तिम यात्रा के साक्षी बने।