पुस्तकालय संस्थान में मनाया गया शिक्षक दिवस, गुरु-शिष्य परंपरा का हुआ भव्य उत्सव

दस्तक 7 मीडिया, दरभंगा /

शिक्षक दिवस की पूर्व संध्या पर पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान संस्थान, दरभंगा में गुरु-शिष्य परंपरा की अनूठी झलक देखने को मिली। भावनाओं और उत्साह से ओतप्रोत इस कार्यक्रम ने न सिर्फ शिक्षकों का सम्मान किया बल्कि छात्रों और शिक्षकों के रिश्ते को भी और गहरा बना दिया।

कार्यक्रम की शुरुआत छात्र-छात्राओं द्वारा गाए गए स्वागत गीत “स्वागतम, स्वागतम” से हुई। इसके बाद डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर दीप प्रज्वलन किया गया। पूरे वातावरण में सम्मान और आभार की मिठास घुल गई।

छात्र-छात्राओं ने शिक्षकों के सम्मान में सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दीं। छात्रा रानी की कविता “माँ, वो माँ की बातें” ने कई लोगों की आंखें नम कर दीं, वहीं अमीषा भारती ने गुरु की महत्ता पर भावपूर्ण भाषण दिया। विद्या कुमारी के प्रेरणादायक गीत ने सबका मन मोह लिया।

इस अवसर पर प्रो. मिथिलेश कुमार पासवान ने डॉ. राधाकृष्णन के जीवन और विचारों पर प्रकाश डालते हुए कहा – “डॉ. राधाकृष्णन केवल राष्ट्रपति ही नहीं, बल्कि महान शिक्षक और चिंतक भी थे।”
प्रो. आर.के. महतो ने कहा कि “शिक्षक समाज के निर्माता होते हैं, और जब शिक्षक-छात्र दोनों अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं, तभी समाज नई ऊँचाइयों को छूता है।”
प्रो. गंगा प्रसाद ने शिक्षा को “ऐसा खजाना बताया जिसे कोई चुरा नहीं सकता” और प्रो. गोपाल कृष्ण झा ने कहा कि “शिक्षक केवल पढ़ाते ही नहीं, बल्कि छात्रों के चरित्र निर्माण में भी अहम भूमिका निभाते हैं।”

कार्यक्रम में स्वागत टोली, गीत टोली, गिफ्ट वितरण और पाग-चादर अर्पण जैसी गतिविधियों में छात्रों की उत्साही भागीदारी रही। सुष्मिता, रानी, प्रतीक, लल्लन, अमर, अमीषा, विवेक, मनीता, दीपिका, खुशबू, यशोदा, चाँदनी, अदिति, रंजन, साजदा, राहुल समेत कई छात्रों ने जिम्मेदारी निभाई।

कार्यक्रम में नेहा कुमारी, अरविंद कुमार, सोनी कुमारी, मीरा कुमारी, संगम कुमारी, राजू कुमार, रंजन झा, अमृता राजपूत, महताब आलम, अमर झा समेत अनेक शिक्षक-छात्र मौजूद रहे।

यह अवसर केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि गुरु-शिष्य रिश्ते को नई ऊँचाई देने वाला भावनात्मक पल था। उपस्थित सभी लोगों के लिए यह दिन एक अविस्मरणीय स्मृति बन गया।