मनरेगा कार्यालय बना शराबखाना ,विदाई समारोह के बाद पुलिस ने मारी रेड, कर्मी समेत चार गिरफ्तार
मनरेगा कार्यालय बना शराबखाना ,विदाई समारोह के बाद पुलिस ने मारी रेड, कर्मी समेत चार गिरफ्तार
मनरेगा कार्यालय बना शराबखाना ,विदाई समारोह के बाद पुलिस ने मारी रेड, कर्मी समेत चार गिरफ्तार
दस्तक 7मीडिया ,कुशेश्वरस्थान /दरभंगा
प्रखंड कार्यालय परिसर का मनरेगा दफ़्तर मंगलवार को शराबखोरी का अड्डा बन गया। सरकारी दफ़्तर में खुलेआम शराब पार्टी चल रही थी और मंच पर ‘विदाई समारोह’ की आड़ में ‘नशे का खेल’ खेला जा रहा था। सूचना मिलते ही पुलिस ने धावा बोल दिया और मौके से मनरेगा कर्मी समेत चार लोगों को गिरफ्तार कर जेल की राह दिखा दी।
कार्यालय परिसर से उठी शराब की गंध
सूत्रों के अनुसार, प्रखंड परिसर स्थित मनरेगा कार्यालय में कार्यक्रम पदाधिकारी (पीओ) संजीव कुमार के विदाई समारोह के बाद अंदर ही अंदर शराब पार्टी का इंतज़ाम किया गया। जैसे ही गिलास टकराए और बोतलें खुलीं, किसी ने इसकी भनक पुलिस को दे दी।
सहायक अवर निरीक्षक मंटू पासवान के नेतृत्व में पुलिस टीम ने छापा मारा तो वहां अफ़रा-तफ़री मच गई। कई लोग अंधेरे का फायदा उठाकर भाग निकले, लेकिन चार लोगों को पुलिस ने दबोच लिया। गिरफ्तार आरोपियों में कासिमपुर निवासी विजय कुमार यादव, अदलपुर के राहुल कुमार पासवान, परमानंदपुर के राम नरेश यादव और बेनीपुर का मनरेगा कर्मी सवेरा कुमार शामिल हैं।
शराबबंदी पर कड़ा सवाल
राज्य में शराबबंदी कानून लागू है, लेकिन सरकारी दफ़्तर में ही शराब पार्टी आयोजित होना इस कानून की पोल खोल देता है। यह सिर्फ़ शराबखोरी का मामला नहीं बल्कि सरकारी दफ़्तर को शराबखाना बनाने की साज़िश है।
थानाध्यक्ष अंकित चौधरी ने कहा कि आरोपियों पर शराबबंदी कानून समेत कई धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है। भागे हुए अन्य लोगों की भी पहचान कर कार्रवाई की जाएगी।
डी.डी.सी. का सख़्त रुख़
डी.डी.सी. स्वप्निल ने साफ कहा – “अगर मनरेगा कार्यालय में शराब पार्टी हुई है और कर्मी गिरफ्तार हुए हैं, तो यह गंभीर लापरवाही है। मैं तुरंत टीम गठित कर जांच करवाऊंगा। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।”
ग्रामीण एसपी ने मानी लापरवाही
ग्रामीण एसपी आलोक ने भी माना कि “विदाई समारोह के बाद कार्यालय परिसर में शराब पार्टी चल रही थी। सूचना पर छापेमारी हुई और चार लोग गिरफ्तार किए गए। मामले की जांच चल रही है।”
गांव में चर्चा – ‘सरकारी दफ़्तर या नशे का अड्डा?’
घटना के बाद पूरे इलाके में चर्चा है कि जब सरकारी कर्मी ही खुलेआम दफ़्तर में बैठकर शराब पार्टी करेंगे, तो शराबबंदी का क्या औचित्य रह जाएगा? ग्रामीणों का कहना है कि यह सिर्फ़ गिरफ्तारी का मामला नहीं, बल्कि सरकारी व्यवस्था और प्रशासनिक अनुशासन पर सीधा तमाचा हे।