डीपीएम डॉ. ऋचा गार्गी के निर्देशन में जीविका दीदियों ने तैयार किए 17 हजार तिरंगे, हर सरकारी भवन पर फहराएगा राष्ट्रीय ध्वज

दस्तक 7मीडिया ,दरभंगा /

‘हर घर तिरंगा – 2025’ में दरभंगा की जीविका दीदियों की बड़ी भूमिका, शिल्पग्राम से हुई 17 हजार तिरंगों की आपूर्ति देशभक्ति और आत्मनिर्भरता का संगम — जीविका दीदियों ने जोश के साथ बनाया 17 हजार तिरंगा झंडा“हर घर तिरंगा – 2025” अभियान के तहत दरभंगा जिले में देशभक्ति और स्वावलंबन की अनूठी मिसाल पेश की जा रही है।

डीपीएम डॉ. ऋचा गार्गी के मार्गदर्शन और प्रेरणा से शिल्पग्राम इकाई की सैकड़ों जीविका दीदियाँ दिन-रात मेहनत कर तिरंगा झंडा तैयार कर रही हैं। इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जिले के प्रत्येक सरकारी भवन, विद्यालय, पंचायत भवन, आंगनवाड़ी केंद्र और सामुदायिक स्थल पर तिरंगा लहराने का संकल्प लिया गया है।
जिले के कुल 10 प्रखंडों से तिरंगे की मांग की गई थी। इसके तहत लगभग 17,000 तिरंगे शिल्पग्राम से तैयार कर सभी प्रखंडों में आपूर्ति की गई है। यह झंडे समय पर संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाए जा चुके हैं, ताकि 15 अगस्त की सुबह पूरे जिले में एक साथ तिरंगा फहराया जा सके।
तिरंगा निर्माण में राष्ट्रीय ध्वज संहिता के सभी मानकों का पालन किया गया है। उच्च गुणवत्ता वाले कपड़े का चयन किया गया, जिसमें रंग की स्थायित्व, कपड़े की मजबूती और सही अनुपात का विशेष ध्यान रखा गया। झंडों की सिलाई में जीविका दीदियों की पारंपरिक सिलाई-कढ़ाई की कुशलता झलकती है। हर झंडा साफ-सुथरी फिनिशिंग और मानक आकार में तैयार किया गया है। इस पहल से जीविका दीदियों को न केवल रोजगार का अवसर मिला है, बल्कि उनके कौशल को पहचान और सम्मान भी मिला है। तिरंगा निर्माण कार्य में लगी महिलाओं ने बताया कि इस प्रोजेक्ट से उन्हें अतिरिक्त आय मिली है, जिससे वे अपने परिवार की जरूरतें पूरी कर पा रही हैं। साथ ही, यह काम उन्हें आत्मनिर्भर बनने और अपने हुनर को बाजार तक पहुंचाने का अवसर दे रहा है। जीविका दीदियाँ गर्व के साथ कह रही हैं कि अपने हाथों से बनाए गए तिरंगे को जब सरकारी भवनों और विद्यालयों में फहरते देखेंगी, तो यह उनके जीवन का अविस्मरणीय क्षण होगा। यह कार्य उन्हें न केवल आर्थिक रूप से मजबूत बना रहा है, बल्कि देश के प्रति गर्व और जिम्मेदारी की भावना भी जगा रहा है। यह पहल प्रधानमंत्री के ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को भी आगे बढ़ाती है, क्योंकि तिरंगों का निर्माण पूरी तरह से स्थानीय स्तर पर किया गया है। इससे न केवल स्थानीय कारीगरों और महिलाओं को काम मिला, बल्कि जिले में स्वदेशी उत्पादों के उपयोग को भी बढ़ावा मिला।
डीपीएम डॉ.ऋचा गार्गी ने कहा कि “यह पहल केवल झंडा निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता और देशभक्ति की भावना को एक साथ आगे बढ़ाने का प्रयास है। जीविका दीदियों ने अपने हुनर, मेहनत और लगन से यह साबित किया है कि अवसर मिलने पर ग्रामीण महिलाएं भी बड़े से बड़ा कार्य सफलतापूर्वक कर सकती हैं।
स्वतंत्रता दिवस पर जब उनके हाथों से तैयार तिरंगा पूरे जिले में लहराएगा, तो यह हम सबके लिए गर्व और प्रेरणा का क्षण होगा।