भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 13 अगस्त 1942 को सीवान के तीन वीर सपूत शहीद हुए थे। इनमें झगड़ू साह, बच्चन प्रसाद और छठु गिरी शामिल थे। बुधवार को शहीद सराय में तीनों वीर सपूतों को श्रद्धांजलि दी गई।

राष्ट्रीय युवा जन जागरण सेवा संस्थान द्वारा शहीद स्मारक स्थल पर आयोजित पुष्पांजलि कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, सामाजिक कार्यकर्ता और स्वतंत्रता सेनानियों के परिजन शामिल हुए।

भारत छोड़ो आंदोलन में शहीद हुए सीवान के तीन वीर सपूतों को श्रद्धांजलि दी गई।

1942 की गोलीकांड की कहानी

भारत छोड़ो आंदोलन की लहर उस समय पूरे देश में फैली हुई थी और सीवान भी इससे अछूता नहीं था। 13 अगस्त 1942 को शहीद सराय में आंदोलनकारी अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। झगड़ू साह, बच्चन प्रसाद और छठु गिरी इसकी अगुवाई कर रहे थे।

ब्रिटिश मजिस्ट्रेट ने उन्हें चेतावनी दी, लेकिन देशभक्त पीछे नहीं हटे। पहले लाठीचार्ज हुआ, फिर पथराव और अंत में अंग्रेजी सैनिकों ने गोलियां चला दीं। तीनों वीर मौके पर शहीद हो गए, जबकि 50 से अधिक आंदोलनकारी घायल हुए।

बलिदान की विरासत

उनकी कुर्बानी की याद में इस स्थान का नाम ‘शहीद सराय’ रखा गया। तब से हर वर्ष यहां श्रद्धांजलि सभा होती है। वक्ताओं ने कहा कि इन शहीदों का बलिदान सिर्फ इतिहास नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है।

देशभक्ति का संदेश

कार्यक्रम में शामिल लोगों ने एक स्वर में कहा कि 13 अगस्त हमें यह याद दिलाता है कि स्वतंत्रता लाखों देशभक्तों की कुर्बानी का नतीजा है। आज जब हम स्वतंत्र भारत में सांस ले रहे हैं, तो इन शहीदों को याद करना ही सच्ची श्रद्धांजलि है।