कागजी घोड़ा दौड़ाने में मधुबनी जिला के पुलिस को महारथ हासिल ,शातिर दिमाग का करते हें इस्तेमाल ?थाने तों बिके लाखों -लाख में ,लेकिन कागजों पर बाइज्जत बरी ?????
कागजी घोड़ा दौड़ाने में मधुबनी जिला के पुलिस को महारथ हासिल ,शातिर दिमाग का करते हें इस्तेमाल ?थाने तों बिके लाखों -लाख में ,लेकिन कागजों पर बाइज्जत बरी ?????
कागजी घोड़ा दौड़ाने में मधुबनी जिला के पुलिस को महारथ हासिल ,शातिर दिमाग का करते हें इस्तेमाल ?थाने तों बिके लाखों -लाख में ,लेकिन कागजों पर बाइज्जत बरी ?????
दस्तक 7मीडिया /संजय कुमार राय
बिहार के नक्शे में मधुबनी जिला एक ऐसा जिला हें जहां वर्षों से पुलिसिया कार्यशैली पर प्रश्न उठते रहें हें ,और आज भी उठ रहें हें, पुलिस के वरीय पदाधिकारी भी इस मामले में स्थिर रहते हें ,यहां के पुलिस अधिकारी शतरंज के चाल की तरह अपने शातिर दिमाग का इस्तेमाल करते हें और बच निकलते हें।गलत काम भी करते हें और सीना भी ठोंकते हें ,ना कोई कहने वाला और ना कोई सुनने वाला।इस जिला में कागजों पर कई अनसुलझे किस्से हें,जिस किस्से को अगर सुलझे हुये पुलिस पदाधिकारी अवलोकन करना शुरू कर दे तों कई राज परत-दर परत खुलने लगेंगे और पुलिस से लोंगों का जो भी बचा हुआ भरोसा हें खत्म हो जाएगा।
मधुबनी जिला के एसपी ने पांच थाने की जो पोस्टिंग की हें वह नियमाकुल बिल्कुल सही हें क्यूंकि इस पोस्टिंग में मिथिला क्षेत्र के डीआईजी के अनुमोदन के बाद ही जिला के एसपी ने पांच थानेदारों की पोस्टिंग की हें।
मधुबनी के एसपी ने पांचों थाने के थानेदार के पदस्थापन को लेकर जो पत्र जारी किया हें उसमें दर्शाया गया हें कि थानाध्यक्ष के खाली पद रहने के कारण इन पदाधिकारियों का पदस्थापन किया गया हें।
लेकिन लदनिया थाना के बने थानेदार पुनि अनूप कुमार के बारे में डीआईजी को दिये पत्र में यह चर्चा नहीं किया गया हें कि पुनि अनूप की पोस्टिंग तीन माह पहले हरलाखी में हुई थी उन्होंने जिक्र किया हें कि कार्यहित और लोकहित में इनका पदस्थापन लदनिया थाना में किया गया हें।
मधुबनी जिला में अप्रत्यक्ष रूप से दर्जन भर से उपर पुलिस पदाधिकारियों के बींच चर्चा हें कि जितने भी थाने हें इन थानों में पोस्टिंग के बदले नाजायज रूप से कई लाख रुपयों की उगाही हुई हें और इसकी मध्यस्ता दलाल सिपाहियों ने की हें।
अक्सर डीआईजी स्तर के पदाधिकारी जिला के एसपी पर भरोसा करते हें कहीं इसी भरोसे का फायदा एसपी ने उठाया हो ? एसपी ने डीआईजी को सही जानकारी नहीं देकर कहीं उनसे उनकी सहमति ले ली हो ?क्यूंकि मिथिला क्षेत्र के डीआईजी के अलग तेवर हें ,और गलत पुलिसिया कार्यशैली पर तुरंत एक्शन मोड में आ जाती हें और कारवाई करने में देर नहीं करती।
यही तों कागजी घोड़ा हें और इसी कागजी घोड़ा के कारण मधुबनी के बॉर्डर इलाके में थानों की बोली लगती हें , वह भी कई लाखों में ।
पोस्टिंग की लिस्ट देखें ,
अब दूसरा उदाहरण दे रहें कि कैसे थानाध्यक्षों की गलत कार्यशैली पर एसपी कारवाई के बदले मामले को इति श्री कर देते हें ?
मधुबनी जिला के अरेर थाना क्षेत्र में थानाध्यक्ष ने दुर्घटना से हुई दो मौत के मामले में थाने में सनहा दर्ज की थी लेकिन प्राथमिकी दर्ज नहीं की। मामले को थाने से ही रफा दफा कर दिया। अगर प्राथमिकी दर्ज हुई होती तों पीड़ित परिवार को कम से कम 4लाख या उससे अधिक सरकारी मुआवजा मिलता।लेकिन अरेर थानाध्यक्ष नेहा निधि की लापरवाही के कारण दोनों पीड़ित परिवार को अबतक मुआवजा नहीं मिला।
इस मामले के संज्ञान में आने के बाद एसपी ने जांच का जिम्मा यातायात डीएसपी को दिया। यातायात डीएसपी ने थाना जाकर दोनों मामले की समीक्षा की।दोनों मामले में यातायात डीएसपी ने पाया कि दुर्घटना से हुई मौत के मामले में सनहा तों थाने में दर्ज की गई हें और आपसी सहमति से बिना वैधानिक कारवाई के रफा दफा कर दिया गया हें।यातायात डीएसपी ने एसपी को अपने पत्र के माध्यम से अवगत कराया । एसपी ने 30मार्च 25को अरेर थानाध्यक्ष को पत्र लिखते हुये कहा कि सड़क दुर्घटना में हुई मृत्यु एवं इस प्रकार के गंभीर घटनाओं को मनमाने तरीके और स्वेच्छाचरिता दिखाते हुये प्राथमिकी दर्ज नहीं करना एक अत्यंत गंभीर मामला हें। इससे स्पष्ट होता हें कि आपके द्वारा कार्यों में कोई रुचि नहीं ली जा रही हें ,तथा उक्त घटनाओं को गंभीरता से नहीं लेते हुये वरीय पुलिस पदाधिकारियों को गुमराह किया जाता हें ,जो आपके प्रति घोर लापरवाही ,कर्तव्यहीनता ,मनमानेपन ,स्वेच्छाचरिता एवं आदेश उल्लंघन का परिचायक हें। मधुबनी के एसपी ने यह भी प्रतिवेदन में कहा था कि 5दिनों के भीतर विभागीय कारवाई के विरुद्ध अपना स्पष्टीकरण दे ,अगर निर्धारित अवधि तक आपका स्पष्टीकरण प्राप्त नहीं होगा तों समझा जाएगा कि आपको अपने बचाव में कुछ नहीं कहना हें और अग्रेतर कारवाई की जाएगी।
एसपी का यह पत्र 30मार्च 25को ही निकला था लेकिन पांच महीना बीत जाने के बावजूद अरेर के थानाध्यक्ष नेहा निधि पर एसपी द्वारा कोई कारवाई नहीं की गई। ना ही थानेदार को निलंबित किया गया और ना ही कोइ विभागीय कारवाई हुई।
अब यहां देखेंगे तों प्रत्यक्ष रूप से एसपी का तेवर समझ में आयेगा लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से जानने का प्रयास करेंगे तों जाहिर सी बात हें कि इस मामले को रफा दफा कर दिया गया। रफा दफा ऐसे तों नहीं हुआ होगा?सूत्र बताते हें कि मोटे पैसों में डील हुई थी और मामला रफा -दफा कर दिया गया।
मधुबनी जिला में प्रत्यक्ष रूप का स्वरूप अलग हें जो कागजी खानापूरी पर टिकी हें ,लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से बड़ा खेल होता हें।ऐसे में सवाल यही हें कि आम जनता का क्या होगा जहां भ्रष्ट पदाधिकारियों की गिनती नहीं हें।
मधुबनी जिला के वरीय पदाधिकारियों का कैसे सांठ -गांठ शराब माफियाओं से हें और किस तरह मधुबनी जिला की पुलिस पूर्व और वर्तमान में काम करते आ रही हें इस अंक को कल के खबरों में पढ़िये।