पत्नी की हत्यारे पति को आजीवन कारावास।

दस्तक 7मीडिया ,विधि संवाददाता /दरभंगा 

सिविल कोर्ट दरभंगा के अपर सत्र न्यायाधीश आदि देव की कोर्ट ने पत्नी की हत्या के जूर्म में पति को शुक्रवार को भारतीय दंड विधान संहिता की धारा 302 के तहत आजीवन सश्रम कारावास और दस हजार रुपये अर्थदण्ड की सजा सुनाई है। श्री आदिदेव की कोर्ट ने पत्नी की हत्या के जूर्म में सदर थानाक्षेत्र के लक्ष्मीसागर बैंकर्स कॉलनी निवासी रमण कुमार चौधरी उर्फ डब्लू कुमार चौधरी को 31जुलाई को दोषी करार दिया था और 8 अगस्त को आजीवन सश्रम कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई है । एपीपी दिलीप कुमार साह ने बताया कि 25 जूलाई 2021 को अहले सुबह लक्ष्मीसागर बैंकर्स कॉलनी में डब्लू चौधरी ने अपनी 15 बर्ष पूर्व ब्याहता पत्नी रिंकी चौधरी के सिर पर खंती से प्रहार कर हत्या कर दिया था।इस जघन्य घटना की सूचना हत्यारे पति डब्लू की बहन ने मोबाईल फोन से मृतिका के पिता को दिया।नेहरा थानाक्षेत्र के इम्ब्राहिमपुर निवासी नूनू चौधरी(मृतिका के पिता) ने इसकी प्राथमिकी सदर थाना में कांड सं.316/21 दर्ज कराया।कोर्ट में इस केश का बिचारण सत्रवाद सं.63/22 के तहत प्रारंभ हुई।अनुसंधानक द्वारा आरोपपत्र समर्पित किया गया।अदालत में पत्नी की हत्या करने वाले पति के बिरुद्ध 11 अप्रैल 22 को आरोप गठन के बाद बिचारण प्रारंभ किया गया।जघन्य हत्या मामले में ट्रायल के दरमियान अभियोजन पक्ष से न्यायालय में कूल 9 गवाहों की गवाही कराई गई।इनमें मृतिका की 11 बर्षीय पुत्री आशू चौधरी और 8 बर्षीय पुत्र आलोक की गवाही हुई।गत 31 जुलाई को कोर्ट ने इस केश की सुनवाई पुरी कर रिंकी चौधरी की हत्या के जूर्म में हत्यारे पति को दोषी करार दिया और शुक्रवार को उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। हत्यारे पति प्राथमिकी दर्ज होने के पश्चात से ही इस हत्याकांड में जेल में बंद है।लोक अभियोजक अमरेंद्र नारायण झा ने बताया कि दरभंगा जिला न्याय मंडल के सिविल कोर्ट दरभंगा, बेनीपुर और बिरौल में लंबित सभी गंभीर सत्रवादों को चिन्हित कर त्वरित न्याय निर्णय कराने के लिए प्रयास जारी है। वे लोक अभियोजक पद पर योगदान के पश्चात कटिबद्ध हैं कि दस वर्षों से पूर्व के जघन्य मामलें में ट्रायल पूरी करबाकर पीड़ितों को न्याय दिलाई जाय। वहीं स्पीडी ट्रायल के तहत चिन्हित मामले और पटना उच्च न्यायालय के द्वारा कतिपय मामले में समयबद्ध ट्रायल पूरी करने से सम्बंधित मामले को गंभीरता से प्राथमिकता के तहत ली गई है। अब किसी भी मामले में तारीख पर तारीख नहीं लगेगी। सभी मामले में विचारण त्वरित गति से होगी। वहीं सभी मामले में पीड़ितों को न्याय दिलाने का प्रयास जारी रहेगी।