दरभंगा जिला के तत्कालीन डीटीओ होंगे गिरफ्तार ,न्यायालय से वारंट जारी।दरभंगा में फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस घोटाले के मास्टरमाइंड डीटीओ एवं अन्य पर हुई थी प्राथमिकी अनुसंधान  /पर्यवेक्षण में पायी गई हें संलिप्तता

दस्तक 7मीडिया /संजय कुमार राय

दरभंगा में *फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस घोटाले* ने पूरे बिहार की साख पर सवाल खड़ा कर दिया हैं ,लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि वारंट निकलने के बाद भी तत्कालीन डीटीओ की गिरफ्तारी अब तक क्यों नहीं हुई हें ? अदालत से गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुका है।

सूत्र बताते हें कि यह  पुरा मामला मिथिला क्षेत्र के डीआईजी के संज्ञान में हें,और उनके द्वारा विधिवत जांच और कारवाई का निर्देश पहले ही दिया चुका हें।

पुलिस सूत्र बताते हें कि यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी गंभीर आपराधिक धाराओं में दर्ज है फिर  भी डीटीओ, प्रोग्रामर, क्लर्क और अन्य आरोपी पर अब तक कारवाई नहीं हुई हें।

इस कांड के आरोपियों के खिलाफ आरोप  हैं

नाजायज रुपये लेकर फर्जी ड्राईविंग लाईसेंस बनाकर बेचना , एक ही DL नंबर पर कई राज्यों में ग़ैरक़ानूनी ढंग से डीएल देना , बिना टेस्ट, मेडिकल या दस्तावेज़ के हाई रिस्क वाहन का लाइसेंस निर्गत करना आदि कई आरोप सामने आ रहें हें।यह मामला  सीधा-सीधा देश की सुरक्षा से जुड़ा हुआ हें

पुलिस पर उठ रहे हैं सवाल

डीटीओ एवं अन्य पर वारंट जारी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से कई सवाल खड़े हो रहें हें।

कानून के जानकार क्या कहते हें 

कानून के जानकारों का मानना है कि यदि कोर्ट का वारंट है और आरोपी फरार हैं, तो पुलिस को IPC की धारा 82 और 83 के तहत “फरार अपराधी” घोषित कर कुर्की-जप्ती की प्रक्रिया तुरंत शुरू करनी चाहिए।

यह मामला दरभंगा में चर्चित हें इस कारण अब कई सामाजिक संगठन के  लोग सवाल करना शुरू कर दिये हें।सवाल यही कि कोई आम आदमी गलती करता हें तों कारवाई में पुलिस देर नहीं करती फिर डीटीओ की गिरफ्तारी में देरी क्यों ?

इस मामले में दरभंगा सिविल कोर्ट के अधिवक्ता राशिद खां ने परिवहन विभाग के सचिव को पत्र लिखकर सारी जानकारियों से भी अवगत कराया था लेकिन उनकी और से अब तक कारवाई नहीं हुई हें।

इस मामले में लहेरियासराय थाने में 32/25मामला दर्ज हें।स्थानीय पुलिस का कहना हें कि तत्कालीन डीटीओ  के विरुद्ध न्यायालय ने वारंट जारी कर दिया हें जिसके कई दिन गुजर गये हें।