मिथिलांचल इलाके का यह जिला जहां थाने की लगती हें बोली ,चर्चा यही कि दस लाख से कम रेट में कोई थाना नहीं ,बॉर्डर इलाके के थानों की बोली 20से 25लाख रुपये ?पैसों की पूंछ इतनी लंबी कि इन बिचौलिये के सामने सभी पुलिस पदाधिकारी बन जाते हें बौने।

दस्तक 7मीडिया /संजय कुमार राय 

अंग्रेज तों चले गये लेकिन उनकी जमींदारी प्रथा को मूर्त रूप देने के लिये अभी भी कई पुलिस पदाधिकारी उसी प्रथा से काम कर रही हें और अप्रत्यक्ष रूप से यह प्रथा कमोवेश जनता पर हावी भी हें। मिथिलांचल का  क्षेत्र हें ,लोग शांतिप्रिय हें ,मगर एसपी साहब की जमींदारी को उनके मंत्री -संतरी अपने तरीके से चला रहें हें ,जहां थानों की बोली लगती हे ?यह हम नहीं कह रहें हें उस जिला में बदलकर गये कई पुलिस पदाधिकारी ही दबे जुबान कह रहें हें।

जी हाँ हम यूं ही नहीं कह रहें हें क्यूंकि कई दारोगा /इंस्पेक्टर साहब छुपे रूप से इस बात की चर्चा कर रहें हें।चर्चा यही कि हम जिस जिला से बदलकर आये हें वहां के एसपी कितने ईमानदार थे ,कभी हम लोंगों को थानेदारी के लिये पैसा नहीं देना पड़ा ,और इतने दिन तक थानेदारी भी  किये।
लेकिन इस जिला में आते ही यहां तों बोली लग रही हें ,इससे तों बढ़िया हें कि किसी थाना में जेएसआई या फिर कहीं  पोस्टिंग हो जाए ,इतना पैसा थानेदारी करने के लिये कहाँ से लायेंगे ?

लेकिन इन्हीं पुलिस पदाधिकारियों में कुछ ऐसे हें जिन्हें थानेदार बनने की ललक हें और पैसा देने के लिये तैयार भी हें ,लेकिन जब इन्हें साहब के बिचौलियों से बात होती हें तों इन्हें पता चलता हें कि थाना खरीदने के लिये यहां थाने को तीन भाग में बांटा गया हें। नाम नहीं छापने पर पुलिस पदाधिकारी बताते हें कि एक तों बॉर्डर इलाके के थाने हें ,दूसरा शहरी /अनुमंडल के थाने हें ,तीसरा छोटे छोटे थाने हें। तीनों जगह के थाने के अलग अलग रेट हें। बताते हें कि बॉर्डर इलाके के थाने का 20से 25लाख रेट तय हो गया हें ,शहरी /अनुमंडल आदि जगहों के 15से 20लाख वहीं छोटे छोटे थानो का दर भी अब दस लाख से कम नहीं हें।अगर इस बात में वास्तविक सच्चाई हें तों आम जनता का भगवान मालिक हें।

थानों की नीलामी के लिये मौका भी जबरदस्त मिला हें ।विधान सभा चुनाव के कारण जिला अवधि पूर्ण कर चुके पुलिस पदाधिकारियों का एक जिला से दूसरे जिला में स्थानांतरण हुआ हें। कई थाने खाली हो रहें हें। एक जिला से दूसरे जिला में पदाधिकारी योगदान कर रहें हें ,इसी मौके का फायदा बिचौलिया भी पीछे रहने को तैयार नहीं हें । इससे पहले भी थाने इन जिलों में बिकते थे लेकिन इतना रेट नहीं था और तरीके भी अलग थे। सूत्र बताते हें कि छः साल पहले यहां बॉर्डर इलाके के थाने 4-5लाख में ,शहरी/अनुमंडल थाना 3-4लाख एवं छोटे छोटे थाने का एक से दो लाख रेट फिक्स था इसके अलावे मंथली रकम अलग से तय था लेकिन दो साल पूर्व इन थानों के रेट में रिवाईज हुआ हें लेकिन इस बार तों हद ही सुन रहें हें।थानों की बोली कई गुना बढ़ गई हें। अब इस बात को सत्यापित करने के लिये ठोस सबूत तों नहीं हें लेकिन कई मामलों पर मुहर तब लग जाती हें जब एसपी द्वारा थानेदारों के गुनाह पर पर्दा डाल दिया जाता हें फिर एसपी की कार्यशैली झलकने लगती हें या फिर जो पुलिस पदाधिकारी ईमानदारी से काम कर रहें होते हें और उन्हें उनके वरीय पदाधिकारियों की कार्यशैली पसंद नहीं आती हें तों भेद खुलने लगता हें ,और ऐसा कई मामलों में देखा भी गया हें। यहां बता देना जरूरी हें कि कुछ जिलों के एसपी काफी ईमानदार हें और थानेदार या अन्य पुलिस कर्मियों द्वारा कोई भी किये गलत कामों पर तुरंत एक्शन में आ जाते हें और कारवाई करने में देर नहीं करते ,लेकिन इस जिला की बात अलग हें
वहीं दूसरी और बताना चाहते हें कि कोई भी बात हम शुरू या खत्म करते हें तों हरि ॐ ,जय श्री राम आदि का सहारा लेते हें। हमें लगता हें कि इन्हीं नाम के लोंगों से उस जिले में किसी भी थाने की बोली का शुरुआत और अंत होती  हें। अक्सर लोग हरि ॐ ही कहते हें।
हरि ॐ कई वर्षों से इस जिला के माटी को खरोंच खरोंच कर खा रहें हें ,इनके पास अकूत सम्पति का भंडार भी  कहा जाता हें। अगर आर्थिक अपराध इकाई की सही कारवाई इन पर हो तों परत दर परत खुल जाएंगे। कहा जाता हें कि इनकी पैठ इतनी हें कि पूर्व के डीजीपी ने इनको इस जिला से रास्ता दिखा दिया था लेकिन एसपी से ऐसी पैठ कि कागजों पर इन्हें समेट दिया और इनकी दबंगई हावी हें।

दरअसल पैसों की पूंछ बहुत लंबी होती हें और पैसा बोलता हें।यह वहीं जिला हें जहां मुख्य धारा में रहें डीएसपी महज दो ढाई साल में पटना में तीन करोड़ से उपर की सम्पति अर्जित की हें,ऐसे कई और पुलिस पदाधिकारी हें।

कहा जाता हें कि इस बिचौलिये का  शातिर दिमाग ऐसा हें  कि बदलते समय के साथ यह करवट बदलता हें और अपनी पैठ जमा लेता हें।वजह  इनके द्वारा थानों के  रेट को समय अनुसार बढ़ाना ,और अकूत पैसों की वसूली कर खुद भी और साहबों को खुश रखना नियति बना हुआ हें इस कारण साहब की मोटी कमाई होती रहती हें  , साहब भी खुश होते रहतें हें  ,केस ,मुकदमों या अन्य मामलो की बात अलग हें।

कहा जाता हें कि बॉर्डर इलाके में बालू खनन और शराब माफियाओं से थानेदारों द्वारा बड़े रूप में अवेध वसूली की जाती हें इस कारण थाने के रेट भी भारी भरकम हो गया हें।