भागलपुर में गंगा नदी ने एक बार फिर विकराल रूप ले लिया है। नदी के जलस्तर में वृद्धि के कारण कई इलाकों में बाढ़ का पानी घुस गया है, जिससे सैकड़ों घर डूब गए हैं। नाथनगर प्रखंड के शंकरपुर पंचायत, रत्तीपुर, गोसाईदासपुर, रंन्नुचक, राघोपुर भुवालपुर, मोहनपुर, अजमेरीपुर, रसीदपुर, दिलदारपुर और बिंद टोली समेत दर्जनों गांवों में पानी घुस गया है। इससे लोगों को घरों से निकलने में काफी परेशानी हो रही है।

बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि उन्हें तीन दिनों से भोजन नहीं मिला है। उन्होंने बताया कि अब तक जिला प्रशासन से कोई राहत नहीं पहुंची है, जिससे उन्हें काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, देर रात से गंगा का पानी तेजी से बढ़ रहा है। कल से अब तक पानी का स्तर दो फीट बढ़ गया है। इस कारण बाढ़ का पानी कई गांवों को अपनी चपेट में ले चुका है।

ऊंची जगहों पर बाढ़ पीड़ित ले रहे शरण

बाढ़ पीड़ित अब ऊंचे स्थानों पर शरण ले रहे हैं। नाथनगर प्रखंड के शंकरपुर और रत्तीपुर पंचायत के दर्जनों गांवों के लोग यूनिवर्सिटी के टिला कोठी, टीएनबी कॉलेजिएट, महाशय दयोढ़ी और नाथनगर सिटीएस चर्च मैदान पर पहुंच रहे हैं।

बाढ़ पीड़ित दिलीप मंडल ने बताया कि वे अपने सामान और पशुओं को लेकर ऊंचे स्थानों पर पलायन कर रहे हैं। पीड़ित अपने नए अस्थायी आशियाने बनाने में जुट गए हैं।

 

गंगा के पानी के बीच से गुजरते नाथनगर के शंकरपुर पंचायत के लोग।
तीन दिन से खाना नसीब नही हो रहा है: बाढ़ पीड़ित

अजमेरीपुर बैरिया की बाढ़ पीड़ित महिला दुविधा देवी ने बताया की पिछले पांच दिनों से लगातार गंगा का पानी बढ़ रहा है, घर डूब जाने से दो तीन दिनों से खाना नसीब नही हुआ है।

दियारा से मुख्यालय का सम्पर्क टूटा

भागलपुर मुख्यालय से महज कुछ ही दूरी पर बसे शंकरपुर और रत्तीपुर पंचायत का भागलपुर मुख्यालय से सम्पर्क टूट गया है। रास्ते पर तीन चार फिट पानी आ गया है, जिससे बड़े छोटे वाहनों को परिचालन मे दिक्क़तें हो रही है। बाढ़ पीड़ितों ने बताया कि अगर यही हाल रहा तो पूरा इलाका जलमग्न हो जायेगा।

पशु की चारा और बिजली पानी की मांग

सैकड़ों की संख्या मे ऊंचे स्थान पर शरण लेने वाले बाढ़ पीड़ितों ने जिला प्रशासन से पशु की आहार और बिजली, पानी की मांग करते हुए सामुदायिक किचन की मांग की है। बाढ़ पीड़ित अनिल महतो ने बताया कि गांव में बाढ़ के कारण काफ़ी नुकसान हुआ है। घर के साथ घर का जरूरी समान भी पानी में बर्बाद हो गया है, जिससे खाने को कुछ नहीं बचा है।