शराब मामले में अपराधियों से पुलिस की सांठ -गांठ पुलिस विभाग के लिये चिंता का विषय ,समस्तीपुर जिला के दो थानों की पुलिस की कार्यशैली संदिग्ध ,जांच के नाम पर वरीय पुलिस पदाधिकारी कर रहें हें सिर्फ खानापूर्ति  ? एक सप्ताह बीत जाने के बावजूद कारवाई नदारद।

दस्तक 7मीडिया ,दरभंगा /संजय कुमार राय 

समस्तीपुर जिला के पुलिसिया कार्यशैली पर बड़ा प्रश्न खड़ा हो रहा हें ,जिला के आलाधिकारियों के समक्ष मामला संज्ञान में आने के बाद भी कोई कारवाई नहीं होती जबकि यह मामला शराब की बरामदगी से जुड़ा हुआ हें।ऐसा लग रहा हें कि जांच के नाम पर जिला के वरीय पुलिस पदाधिकारी ऐसे गलत कार्य में संलिप्त पुलिसकर्मियों को सह दे रहें हें।

जी हाँ हम बात कर रहें हें समस्तीपुर जिला के दो थाना की पुलिस के गलत कार्यशैली के बारे में ,जिसकी चर्चाएं जोरों पर हें।पहले नंबर पर पटोंरी थाना हें वहीं दूसरे नंबर पर नगर थाना हें ,जहां के पुलिसिया कार्यशैली पर सवाल उठ रहें हें।पटोंरी थाना के मामले में मजेदार बात यह हें कि स्कार्पियो गाड़ी से बीयर की बोतल बरामद होने के बाद भी उक्त स्कार्पियो के बाबत दर्ज प्राथमिकी में कहीं चर्चा नहीं की गई हें ,जबकि शराब (बीयर )उक्त स्कार्पियो (BR31PA-5019)से पुलिस ने बरामद की हें। स्कार्पियो से बरामद करते हुये एक वीडियो भी वायरल हुआ था।
लेकिन पुलिस की कारगुजारी देखिये स्कार्पियो से बरामद शराब के मामले में एक मोटरसाईकिल (BR31AW-7281) को दर्शा दिया गया हें।
इससे मतलब तों स्पष्ट हें कि भारी भरकम लेन देंन कर स्कार्पियो को पुलिस ने छोड़ दिया हें ताकि स्कार्पियो मालिक का नाम कहीं से भी उजागर नहीं हो ?
वायरल वीडियो को देखने से साफ पता चलता हें कि पुलिस ने स्कार्पियो से बीयर को बरामद किया हें। हालांकि वायरल वीडियो की पुष्टि दस्तक 7नहीं करता हें।

वायरल वीडियो देखें।

 

 

यह मामला पटोरी थाना क्षेत्र का हें। 20जुलाई की रात गुप्त सूचना पर एलटी एफ प्रभारी पुअनि मो सलाउद्दीन खां के नेतृत्व में धमोन मिर्जापुर गांव में छापेमारी की गई थी ,इसी दौरान स्कार्पियो की तालाशी ली गई थी। स्कार्पियो के डिक्की से पुलिस ने भारी मात्रा में बीयर का केन बरामद किया था ,लेकिन पुलिस जब थाने लौटी और इस बाबत जो प्राथमिकी दर्ज हुई ,उस प्राथमिकी में स्कार्पियो की चर्चा नहीं की गई ,स्कार्पियो के बदले बुल्लेट मोटरसाइकिल को दर्शा दिया गया हें।

भला एक बुल्लेट मोटरसाईकिल पर कैसे 225लीटर बीयर को रखा जा सकता हें। इससे स्पष्ट प्रतीत हो रहा हें कि शराब के धंधेबाजों और पुलिस के बींच हुई सांठ गांठ के बाद ही स्कार्पियो को प्राथमिकी की जब्ती सूची में दर्शाया नहीं गया हें। एसपी अरविंद प्रसाद सिंह ने एक सप्ताह पूर्व ही मामले को संज्ञान में लिया था और जांच का आदेश पटोरी के एसडीपीओ को दिया था लेकिन मामला जस का तस हें।ऐसे गंभीर मामलों में एक सप्ताह से अधिक बीत जाने के बाद एसडीपीओ द्वारा जांच प्रतिवेदन एसपी को उपलब्ध नहीं कराना मतलब दाल में कुछ काला हें।

वहीं दूसरी और समस्तीपुर जिला के नगर थाने का मामला सामने आ रहा हें। दो माह के करीब से एक कार प्राथमिकी और जब्ती सूची के बिना ही थाने में हें । सूत्रों की माने तों कहना हें कि एक जून को नगर थाने की पुलिस ने मकरदही मुहल्ला स्थित
बनारस स्टेट केम्पस में छापेमारी कर जितेंद्र कुमार को एक देशी कट्टा और कारतूस के साथ गिरफ्तार किया था वह कार (BR09AM-9823)से कहीं जा रहा था। सूत्रों का कहना हें कि कार को भी पुलिस बरामद की थी लेकिन इस मामले में जो प्राथमिकी दर्ज हुई उसमें इस जब्त कार का कहीं जिक्र नहीं किया गया हें।
उक्त कार जितेंद्र कुमार के नाम से ही हें।

लेकिन नगर थानाध्यक्ष का इससे उलट कहना हें , थानाध्यक्ष कहते हें कि यह कार लावारिस हालत में पाया गया था जिसे बरामद कर थाने लाया गया। एसएसपी संजय पाण्डेय ने कहा था कि नगर थाने से विस्तृत जानकारी ली जा रही हें,विधि सम्मत कारवाई की जाएगी।
अब सवाल हें कि यह कैसे संभव हें कि जितेंद्र हथियार के साथ पकड़ा गया और गाड़ी लावारिस हाल में पुलिस को मिली जो संयोग से जितेंद्र कुमार के ही नाम से हें।यह बात कहीं से हजम नहीं होती ?

इस दोनों प्रकरण में पुलिस की कार्यशैली संदिग्ध हें जिसे जांच के नाम पर वरीय पुलिस पदाधिकारी टाल मटोल की नीति अपना रहें हें।समय रहते इन मामलों में जांचोपरांत जिला के वरीय पुलिस पदाधिकारी कारवाई नहीं करते हें फिर वह दिन दूर नहीं जब ऐसे गलत कार्य करने वाले पुलिसकर्मियों का हौसला बढेगा ,  फिर थाना स्तर के पदाधिकारी नंगा नाच करने लगेंगे,जिसका शिकार आम आदमी होंगे।