समाहरणालय सभागार में शुक्रवार को डीएम मनेश कुमार मीणा की अध्यक्षता में शिक्षा विभाग की महत्वपूर्ण समीक्षात्मक बैठक आयोजित की गई। बैठक में डीएम ने शिक्षा व्यवस्था की बारीकी से समीक्षा करते हुए कई अहम निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्कूलों की मूलभूत संरचना, शिक्षण गुणवत्ता और बच्चों की शैक्षणिक उपलब्धियों में सुधार लाना जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
बैठक के दौरान डीएम ने निर्देश दिया कि वैसे सभी मतदान केंद्रों की पहचान कर ली जाए जहां भवन मरम्मति, विद्युतीकरण, रैम्प, शौचालय, पेयजल या अन्य जरूरी उपस्करों की कमी है। इन सभी केंद्रों पर संबंधित विद्यालय या एजेंसी के माध्यम से कार्यों को त्वरित गति से पूरा कराना सुनिश्चित किया जाए और इनकी प्रगति की नियमित निगरानी भी की जाए। मध्याह्न भोजन योजना की समीक्षा के क्रम में डीएम ने कहा कि बच्चों की औसत उपस्थिति बढ़ाने के लिए समग्र प्रयास किया जाए और स्कूलों में नामांकित सभी बच्चों की शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। पोषण वाटिका वाले विद्यालयों में उगाई गई सब्जियों के उत्पादन और उपयोग का स्पष्ट ब्योरा विद्यालय प्रमुखों से लिया जाए।
उन्होंने निःशुल्क पाठ्यपुस्तकों की उपलब्धता पर भी चिंता जताते हुए निर्देश दिया कि जिन स्कूलों में किताबों की कमी है, वहां राज्य कार्यालय को तुरंत अधियाचन भेजा जाए ताकि समय रहते किताबें उपलब्ध कराई जा सकें। स्कूलों के निरीक्षण में गति लाने के लिए डीएम ने सुझाव दिया कि बिहार शिक्षा परियोजना में पदस्थापित सहायक और कनीय अभियंताओं को इस कार्य में लगाया जाए। इससे न केवल आधारभूत संरचनाओं की जांच हो सकेगी, बल्कि शिक्षण गतिविधियों का भी समुचित मूल्यांकन संभव होगा।
कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की स्थिति पर भी विशेष चर्चा हुई। डीएम ने निर्देश दिया कि इन स्कूलों के शौचालय स्वच्छ और बेहतर हों। आवश्यकता हो तो टाइल्स आदि की भी व्यवस्था की जाए। साथ ही जहां भवन मरम्मति की जरूरत हो, उन विद्यालयों की सूची तैयार कर राज्य कार्यालय को भेजी जाए और तुरंत अनुदान प्राप्त कर कार्य प्रारंभ किया जाए। शैक्षणिक आधारभूत संरचना से जुड़ी योजनाओं की समीक्षा के दौरान यह भी निर्देश दिया गया कि नामित एजेंसी से संपर्क कर अधूरी या असंचालित योजनाओं का ब्योरा प्राप्त किया जाए।
