सीवान जिले के व्यस्त बबुनिया मोड़ के पास ललन कॉम्प्लेक्स के सामने राहगीरों ने सड़क किनारे भारी मात्रा में फेंकी गई दवाइयों का ढेर देखा। इस दृश्य ने स्थानीय लोगों को हैरान कर दिया। फेंकी गई दवाओं में विटामिन, फूड सप्लीमेंट और अन्य प्रकार की दवाएं शामिल थी। चिंताजनक बात यह है कि इनमें से कई दवाएं अभी एक्सपायर भी नहीं हुई थीं।

विशेषज्ञों के अनुसार, दवाओं के निष्पादन के लिए एक निर्धारित प्रक्रिया होती है। दवाओं को घोलकर नष्ट करना या जमीन में सुरक्षित तरीके से दबाना चाहिए। इस तरह खुले में लाखों की दवाएं फेंकना कानूनी रूप से आपत्तिजनक है। यह पर्यावरण और जानवरों के लिए भी खतरा बन सकता है।

CS ने जांच करवाने का दिया आश्वासन

सिविल सर्जन डॉ. श्रीनिवास प्रसाद ने कहा कि यह मामला उनके संज्ञान में आया है। उन्होंने जांच करवाने का आश्वासन दिया है। उन्होंने स्वीकार किया कि दवाओं को इस तरह खुले में फेंकना स्वास्थ्य मानकों का उल्लंघन है।

फेंकी गई दवाओं में अधिकतर फूड सप्लीमेंट ड्रग्स हैं। इनका उपयोग पोषण पूरक के रूप में किया जाता है। लोगों में यह सवाल उठ रहा है कि जब जिले में कुपोषण से पीड़ित लोग हैं, तो इन दवाओं का उपयोग हेल्थ कैंप लगाकर क्यों नहीं किया गया।

दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग

इस घटना के बाद आम लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। प्रशासन की लापरवाही और चिकित्सा विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। दोषियों की पहचान कर कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।