सुपौल सदर प्रखंड के नरहैया गांव स्थित प्राथमिक स्कूल में शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। बच्चे प्रतिदिन पुराने स्कूल स्थल पर पहुंचते हैं, जहां वे 2 घंटे खेलकर लौट जाते हैं। असल में स्कूल का संचालन अब 5 किलोमीटर दूर मध्य विद्यालय पिपराखुर्द में अस्थायी रूप से किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि, ‘शिक्षक दूरी के कारण पुराने स्थान पर नहीं पहुंचते, जिससे बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह बाधित हो रही है।’

स्कूल में करीब 250 बच्चे पढ़ते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि साल 1956 से यह स्कूल गांव में संचालित था, लेकिन पिछले साल आई बाढ़ में स्कूल कोसी नदी में समा गया। इसके बाद विभाग ने संचालन अस्थायी तौर पर दूर के पिपराखुर्द स्कूल में ट्रांस्फर कर दिया, जहां तक छोटे बच्चों का पहुंचना कठिन है। इससे अधिकांश छात्र शिक्षा से वंचित हो रहे हैं।

सुपौल स्थित प्राथमिक स्कूल के बच्चे।

ग्रामीणों के सहयोग से तैयार हुआ नया भवन

नरहैया के ग्रामीणों ने सामाजिक सहयोग से स्कूल भवन के लिए जनवरी में ही नया भवन तैयार करा लिया है, लेकिन इसके बावजूद विभागीय पहल नहीं हो रही है। स्कूल में 4 शिक्षक पदस्थापित हैं, लेकिन भवन की उपलब्धता के बावजूद विभाग की अनदेखी के कारण न तो शिक्षक आते हैं और न ही पठन-पाठन होता है।

स्कूल को पुराने स्थान पर ट्रांस्फर करने की मांग

ग्रामीणों ने इस मामले में जिला शिक्षा पदाधिकारी को ज्ञापन सौंप कर स्कूल को दोबारा पुराने स्थान पर ट्रांस्फर करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यह निर्णय जल्द नहीं लिया गया तो बच्चों का भविष्य और अंधकारमय हो जाएगा।

स्थल की समीक्षा के लिए DPO को भेजा जाएगा

वहीं, जिला शिक्षा पदाधिकारी संग्राम सिंह ने बताया कि स्थल निरीक्षण के लिए BEO को भेजा गया था, लेकिन वहां आवश्यक सुविधाओं की कमी पाई गई। अब दोबारा स्थल की समीक्षा के लिए DPO को भेजा जाएगा। उनकी रिपोर्ट के बाद ही कोई निर्णय लिया जा सकेगा। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द कदम उठाने की मांग की है ताकि बच्चों को सुलभ और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।