कुशेश्वरस्थान से खगड़िया जानेंवाली सड़क के घटिया निर्माण को लेकर उठने लगे सवाल ,ग्रामीणों में आक्रोश,लोंगों ने कहा कि सड़क कीजांच हो तो 40प्रतिशत घटिया हैं निर्माण कार्य।
कुशेश्वरस्थान से खगड़िया जानेंवाली सड़क के घटिया निर्माण को लेकर उठने लगे सवाल ,ग्रामीणों में आक्रोश,लोंगों ने कहा कि सड़क कीजांच हो तो 40प्रतिशत घटिया हैं निर्माण कार्य।
सड़क के घटिया निर्माण से स्थानीय लोंगों में आक्रोश
दरभंगा में संवेदक और इंजीनियर की सांठ गांठ से घटिया निर्माण बदस्तूर जारी हैं।दो माह पूर्व हुये सड़क निर्माण के अचानक धंसने से इंजीनियर और ठेकेदार पर बड़ा प्रश्न उठने लगा हैं। मजेदार बात यह हैं कि सड़क निर्माण कार्य के दौरान ठेकेदार बोर्ड तक नहीं लगाते हैं और इंजीनियर मूकदर्शक बने रहते हैं। वजह तो सबको मालूम हैं।
हम एस एच 56की बात कर रहें हैं। बोर्ड नहीं रहने के कारण यह पता नहीं चल पा रहा हैं कि योजना कितने की हैं। स्थानीय लोंगों का कहना हैं कि 21किलोमीटर बनने वाली यह सड़क करीब 6सौ करोड़ का हैं वहीं पुल पुलिया तकरीबन 280करोड़ का हैं।
अब सड़क और पुल पुलिया के निर्माण की बात करें तो कुल 680करोड़ की लागत से बनने वाली इस सड़क के घटिया निर्माण पर प्रश्न चिन्ह खड़ा हो गया हैं।
लोंगों ने कहा हैं कि एसएच 56 की बनने बाली यह सड़क कुशेश्वरस्थान से फूलतोड़ा तक दो माह पूर्व ही बनी हैं। यह सड़क तदगचछा होते हुये खगड़िया जिले के फूलतोड़ा पुल के पास मिलती हैं।
बताया जा रहा हैं कि कुशेश्वरस्थान थाना क्षेत्र के तेगचछा पुल और उजवा गांव के बीच सड़क धंस गया हैं। धंसे हुये सड़क को देखने से पता चलता हैं कि इस बनाए गये सड़क की गुणवत्ता क्या हैं।अब यह तो इंजीनियर ही बता पाएंगे लेकिन देखने से यह जरूर पता चल रहा हैं कि सड़क में तकरीबन चालीस प्रतिशत मेटेरियल का इस्तेमाल कम किया हैं। इस सड़क के धंसने से इसकी गुणवत्ता नजर आती हैं। अगर 40%घटिया निर्माण की बात करें तो 240करोड़ रुपये सरकार का सीधे नुकसान हैं। ऐसे में जिला प्रशासन को चाहिये कि घटिया निर्माण को लेकर पूरे सड़क के गुणवत्ता की जांच पटना स्थित विभाग निगरानी से जांच करायी जाय और जांचोपरांत जितना घटिया निर्माण संवेदक द्वारा किया गया हैं उसकी वसूली की जाय।
दरभंगा जिला में पूर्व में ऐसी कारवाई हो चुकी हैं।
लहेरियासराय टावर से विश्वविद्यालय की और जानें वाली और हजमा चौराहा से विश्वविद्यालय ,शिवधारा ,मब्बी जानें वाली सड़कों की ढलाई डेढ़ दशक पहले हुई थी। लहेरियासराय से बलभद्र पुर और हजमा चौराहा से दारू भट्टी तक सड़क की ढलाई हुई थी और उखड़ने लगी। इस मामले को तात्कालीन कमिश्नर दीपक प्रसाद ने गंभीरता से लिया। उन्होंने सरकार को पत्र लिखा। जांच टीम आई। 40%घटिया निर्माण पाया गया था। तब तक कंपनी कमला कंस्ट्रक्शन को चार करोड़ का भुगतान हुआ था। 40%घटिया निर्माण यानि 1करोड़ 40लाख रुपये गबन को लेकर सात इंजीनियर और कमला कंस्ट्रक्शन के मालिक पर प्राथमिकी हुई और पुलिस ने सभी इंजीनियर और ठेकेदार को गिरफ्तार कर जेल भेजा।
इस सड़क के मामले में जांच कर ऐसी ही कारवाई की जरूरत हैं। सड़क के किनारे दोनों तरफ मट्टी बह रही हैं ऐसा लग रहा हैं कि इसपर रोलर ठीक से चलाया नहीं गया हैं। सड़क के किनारे बोरे में बालू भरकर जगह जगह रखना हैं लेकिन संवेदक द्वारा बोरे में मट्टी भरकर दिया जा रहा हैं लेकिन यह काम भी पूरा नहीं किया हैं।
अब सवाल उठता हैं कि क्वालिटी कंट्रोल के अधिकारी कैसे जांच कर गुणवता सहित अपना प्रतिवेदन ठेकेदार के पक्ष में दें देते हैं। कैसे कार्यपालक अभियंता ठेकेदार को भुगतान कर देते हैं ?सभी लोग जानते हैं कि किसी भी ठेकेदारी के काम में जेइ ,विभाग के एसडीओ और कार्यपालक अभियंता का क्या कमीशन का प्रतिशत हैं। और ऐसे घटिया निर्माण पर ठेकेदार इतना पैसा अधिकारी को देते हैं कि सभी अधिकारी गद गद।
ग्रामीणों का कहना हैं कि अगर यह सड़क नहीं धंसती तो सड़क के गुणवत्ता का पता नहीं चलता। स्थानीय लोग कहते हैं कि कई जगहों पर तो सड़क धंसना शुरू कर दिया हैं। ऐसे में सड़क के गुणवत्ता पर प्रश्न उठना लाजमी हैं।
स्थानीय लोग बताते हैं कि बोर्ड कहीं लगा हुआ नहीं हैं जिस कारण पता नहीं चल पाता हैं। कुछ लोग बताते हैं कि श्री राम इंटरप्राइजेज नामक कंपनी हैं। कुछ लोंगों ने कहा कि प्रोजेक्ट मेनेजर शेलेश जी हैं। लेकिन प्रोजेक्ट मेनेजर शेलेश का जो नंबर मिला उसपर फोन कर जानकारी लेने का प्रयास किया।
उन्होंने कहा कि में इस कंपनी का कुछ भी नहीं हुं।जब्कि विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि यही प्रोजेक्ट मेनेजर हैं।