बिहार में सवर्ण समाज के छात्रों ,युवाओं और शिक्षित बेरोजगारों के साथ कानूनी और योजनागत भेद-भाव लगातार जारी-राष्ट्रीय अध्यक्ष संजीव कुमार सिंह
बिहार में सवर्ण समाज के छात्रों ,युवाओं और शिक्षित बेरोजगारों के साथ कानूनी और योजनागत भेद-भाव लगातार जारी-राष्ट्रीय अध्यक्ष संजीव कुमार सिंह
बिहार में सवर्ण समाज के छात्रों ,युवाओं और शिक्षित बेरोजगारों के साथ कानूनी और योजनागत भेद-भाव लगातार जारी-राष्ट्रीय अध्यक्ष संजीव कुमार सिंह
दस्तक 7 मीडिया दरभंगा /
अखिल भारतीय सवर्ण मोर्चा ने कहा की बिहार में वर्ष 2011 में गठित ऊंची जाति के राज्य आयोग सवर्ण आयोग को जन्म देकर मार देने जैसा काम करने वाली नीतीश सरकार एक बार फिर से सवर्ण समाज को आईवाश करने जैसा घोषणा किया है। आज तक ऊंची जाति के राज्य आयोग को नीतीश सरकार ने कभी खुलकर काम करने दिया। यहां तक की ऊंची जाति के राज्य आयोग सवर्ण आयोग को संवैधानिक दर्जा तक नहीं दिया गया था। उक्त बातें अखिल भारतीय सवर्ण मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजीव कुमार सिंह ने कहा कि बिहार में सवर्ण समाज के छात्रों युवाओं शिक्षित बेरोजगारों के साथ कानूनी और योजनागत भेद-भाव लगातार जारी है। आज तक बिहार में सवर्ण छात्रवृत्ति -सवर्ण छात्रावास-सवर्ण शिक्षा प्रोत्साहन योजना लागू ही नहीं हुआ। सवर्णों को स्वरोजगार रोजगार में आर्थिक सहायता हेतू सवर्ण वित्त निगम की स्थापना ही नहीं की गई। सवर्णों के समाजिक विकास हेतू सवर्ण विकास निगम नहीं बनाया गया। साथ ही सवर्ण समाज के समाजिक सम्मान का बरकरार रखने हेतू सवर्ण एक्ट जैसा कानून ही बनाया गया। जबकि लाखों एससी एसटी एक्ट के झूठे व बनावटी मामले सवर्ण समाज के लोगों पर लाद दिया गया है। सवर्ण मोर्चा राष्ट्रीय अध्यक्ष ने आगे कहा की बिहार में ऊंची जाति के राज्य आयोग काम काज तक नहीं हो पाया था। उसकी असामयिक निधन जैसे हालात बन गए थे। अतः बिहार और देश के सवर्णों को बहुत नाचने गाने की कोई जरूरत नहीं है। नीतीश कुमार प्रत्येक वर्ष बजट में से अनुसूचित जाति जनजाति के लिए अलग-अलग योजनाएं और बजट प्रावधान किए हुए हैं। उसी प्रकार पिछड़ा वर्ग कल्याण के नाम पर बजट,अल्पसंख्यक विकास के नाम पर बजट का प्रावधान है। केवल सवर्ण समाज के विकास के लिए कोई बजट आज तक आवंटित नहीं किया गया। दरअसल सवर्ण समाज को नीतीश सरकार बराबरी का हक अधिकार देने को तैयार ही नहीं है। आर्थिक आधार पर आरक्षण में भी बिहार सरकार दुसरे समुदाय को मौका दिया करती है।