जानकारी के मुताबिक, मिड-डे मील में छिपकली पाए जाने के बाद कई बच्चों ने उल्टी करना शुरू कर दिया। एक छात्र की तबीयत बिगड़ने पर उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। बच्चे की परिजन आशा देवी ने बताया कि, छिपकली वाला खाना खाने के बाद उनके पोती को लगातार छह से सात बार उल्टियां हुईं, जिसके बाद आनन-फानन में उसे अस्पताल ले जाना पड़ा। ग्रामीणों का आरोप है कि विद्यालय में न तो गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा दी जाती है और न ही शिक्षक बच्चों पर ध्यान देते हैं। सभी शिक्षक मोबाइल में व्यस्त रहते हैं और विद्यार्थियों की पढ़ाई पर बिल्कुल ध्यान नहीं दिया जाता। विद्यालय की प्रधानाध्यापक सविता देवी ने भी मामले की गंभीरता को स्वीकारते हुए कहा कि, “हमें भी इस घटना की जानकारी मिली है। यह कहीं न कहीं शिक्षकों की लापरवाही का नतीजा है कि बिना जांच के ऐसा भोजन परोसा गया। हम इसकी पूरी जांच करेंगे।”
घटना की जानकारी मिलने पर जिला परिषद प्रतिनिधि मनोज मंडल भी विद्यालय पहुंचे और सभी ग्रामीणों की बातें सुनीं। उन्होंने आश्वासन दिया कि, शिक्षा विभाग से संपर्क कर दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो वे उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
कई बच्चों ने की उल्टियां
मौके पर हथवारा पंचायत की मुखिया भारती कुमारी पहुंचीं और हालात का जायज़ा लिया। फालका पुलिस ने भी मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों को समझाने-बुझाने की कोशिश की, लेकिन ग्रामीण प्रधानाध्यापक का तबादला करने की मांग पर अड़े हुए हैं।
प्राधानाध्यापक सविता देवी ने मानी गलती
दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग
