दरभंगा के हॉस्पिटल रोड में हुई छापेमारी में रुपये से भरा बैग ,सोने के बिस्किट एवं दो कारवाईन बरामद होने की चर्चा जोरों पर ,एक महिला समेत तीन पुरुष , दो बच्चों के साथ उठाकर ले गई पुलिस ,स्थानीय पुलिस को इसकी खबर तक नहीं ,आखिर कौन पुलिस वाले थे जिन्होंने की थी छापेमारी ?

दस्तक 7मीडिया /संजय कुमार राय 

भारत -पाक युद्ध विराम के बाद पुलिस भले ही हाथ पर हाथ रखकर बैठ गई हो लेकिन अपराधी /आतंकी किस्म के लोग हमेशा सजग और गलत फिराक में रहते हें यही नहीं किसी ना किसी घटना को अंजाम दे डालते हें।ऐसे में सतर्क रहने की जरूरत हें।पुलिस विभाग टेक्निकल सेल के सहारे अपराधी /आतंकी को पकड़ने में कामयाब जरूर होती हें लेकिन स्थानीय नेटवर्क नहीं रहने के कारण कई बड़े मामले हाथ से फिसल जाते हें और ऐसा ही मामला दरभंगा जिला से सामने आ रहा हें।

लहेरियासराय /बेता थाना क्षेत्र के हॉस्पिटल रॉड स्थित एक मकान में शनिवार की देर रात हुई छापेमारी का चर्चा आम लोंगों के जुबान पर हें लेकिन स्थानीय पुलिस को इसकी भनक तक नहीं हें।स्थानीय कई लोग बताते हें कि पटना से आयी पुलिस की टीम ने यह छापेमारी की हें।

दो बैग एक ट्रॉली के साथ एक महिला तीन पुरुष को किया गया था गिरफ्तार ,दो बच्चे भी थे साथ 

चर्चा हें कि पुलिस ने दो बैग एक ट्रॉली समेत चार लोंगों को गिरफ्तार कर अपने साथ ले गई हें। स्थानीय लोंगों का कहना हें कि ट्रॉली बैग में दो कारवाईन ,कुछ नगदी एवं सोने के बिस्किट थे।यह घटना शनिवार के दिन यानी 10मई 25के साढ़े दस बजे रात की बतायी जाती हें जब एक वर्दी में और तीन सादे लिबास में आये पुलिस पदाधिकारियों ने छापेमारी की थी।

दस्तक 7मीडिया को मिली थी गुप्त सूचना 

दस्तक 7मीडिया को पता चला था कि आनंद रेस्ट हाउस की गली से थोड़ा आगे हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ राम आशीष यादव के कंपाउंडर संतोष कुमार यादव ने इन संदिग्ध लोंगों को ठहरने के लिये ठीक सामने का मकान रेंट पर लिया था।उस कमरे में पहले एक महिला के साथ दो बच्चे एवं एक पुरुष ठहरा था बाद में दो पुरुष और उस रूम में आया था ,जिसे पुलिस पकड़कर अपने साथ ले गई।

इस घटना के बाद फिलहाल संतोष यादव भी फरार बताया जा रहा हें।

दस्तक 7मीडिया की टीम को जब इस बात की जानकारी चार दिनों बाद मिली तों घटना के बाबत जानकारी लेने उस घर तक पहुंची जिस मकान में ये लोग ठहरे हुये थे।यहां बता दे कि इस मकान में बहुत पहले सनराइज स्कूल चलता था जो फिलहाल बंद हें लेकिन कुछ कमरे किराए पर दिया जाता हें।

मकान मालिक ने खोला राज 

इस मकान के मालिक डीएमसीएच में कार्यरत चमन कुमार उर्फ शिवम श्रीवास्तव ने कहा कि वह शुक्रवार के दिन डॉ रामाशीष यादव के कंपाउंडर संतोष कुमार यादव के कहने पर एक रूम दिया था जिसमें एक महिला एवं एक पुरुष समेत दो बच्चे उनके रूम में ठहरे थे ,शनिवार को दो और लोग रूम में आये थे लेकिन साढ़े दस बजे के करीब एक वर्दी में एवं तीन अन्य सादे लिबास में पुलिसकर्मी आकर उस रूम में छापेमारी किये थे और हम लोंगों को उस रूम में आने से मना किया था।जिस कारण कुछ पता नहीं चल सका लेकिन पुलिस के साथ आये लोंगों ने एक महिला समेत तीन पुरुषों को गिरफ्तार किया उस दौरान दो बच्चे भी थे ,सभी को लेकर पुलिस वाले कहाँ गये उन्हें पता नहीं हें ।चमन ने कहा कि उसकी कोई गलती नहीं हें ,संतोष को वह जानता था इसीलिये रूम दे दिया।

लेकिन वहां के कई लोंगों का दबे जुबान में कहना कि ट्रॉली में दो कारवाईन ,एक रुपयों से भरा बैग एवं एक बैग में सोना था जिसे पुलिस बरामद करते हुये अपने रूम में ठहरे सभी को अपने साथ लेकर चली गई ।

संतोष अब कंपाउंडर नहीं ?

दस्तक 7मीडिया की टीम इसके बाद डॉ रामाशीष यादव से उनके क्लीनिक में भेंट कर इस बाबत बातचीत की। डॉ श्री यादव का कहना था कि संतोष कुमार यादव उनका कंपाउनडर था जो अब कई महीनों से उनके यहां काम नहीं करता हें और वह नेपाल का रहने वाला हें। डॉ श्री यादव ने कहा कि उनका सीसीटीवी खराब हें नहीं तों सभी लोंगों का फोटो मिल जाता। उन्होंने और उनके कई कंपाउंडरो ने कहा कि सामने के मकान में शनिवार को छापा जरूर पड़ा था।

अब सवाल उठता हें कि छापेमारी करने वाले वह सभी पुलिसकर्मी कौन थे ?

जिनकी गिरफ्तारी हुई हें वह महिला -पुरुष कौन थे ?और पांच दिनों बाद अब कहाँ हें ?अगर दो कारवाईन ,सोने एवं रुपयों के साथ ये सभी पकड़े गये तों गिरफ्तार करनेवाली पुलिस कौन थी ?क्या पटना से आयी एटीएस की पुलिस ,एसटीएफ या अन्य विभाग की पुलिस थी लेकिन पांच -छः दिन बीत जाने के बाद भी कहीं यह बात चर्चा में नहीं आयी ,ना ही दरभंगा से पटना तक किसी पुलिस ने प्रेस वार्ता ही किया।

दरभंगा की पुलिस लहेरियासराय थाना के प्रभारी थानाध्यक्ष ने कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं हें।वहीं पुलिस के आला अधिकारी भी इस छापेमारी से इनकार कर रही हें ?ऐसे में सवाल उठना लाजमी हें कि आखिर कौन से विभाग की टीम ने यंहा छापेमारी की ?सवाल तों बनता हें कि अगर सोने ,रुपये एवं कारवाईन के साथ ये लोग पकड़े गये हें तों यह मामला बहुत बड़ा हें,और इसका खुलासा क्यूँ नहीं हुआ ?

सीसीटीवी फुटेज से चल सकता हें पता कि आखिर वह पुलिस वाले कौन थे 

इस मामले की तहतक जाने के लिये पुलिस को इस गली के सीसीटीवी फुटेज को खंगालना पड़ेगा  फिर पता चल सकता हें कि वह पुलिसवाले कौन थे।

आतंकी /अपराधी /माओवादी तों नहीं ?

स्थानीय लोंगों पर भरोसा करें तों दो कारवाईन की बरामदगी अपने आप में बड़ी बात हें ,कहीं नेपाल के रास्ते आये ये आतंकी /अपराधी /माओबादी तों नहीं थे?

सदर एसडीपीओ ने की थी मस्जिद की जांच 

यहां बता दे कि शनिवार के दिन ही सदर एसडीपीओ और लहेरियासराय के प्रभारी थानाध्यक्ष लहेरियासराय स्थित मस्जिद के जांच पड़ताल में गये थे लेकिन इस बारे में इन पदाधिकारियों कोइ भी  जानकारी नहीं हें।अब इस पूरे प्रकरण की जांच के बाद ही खुलासा हो पाएगा।