खादी ग्रामोद्योग संघ बिरौल, जो कभी खादी वस्त्र निर्माण का केंद्र था और महत्वपूर्ण व्यक्तियों का आश्रय स्थल माना जाता था, आज उपेक्षा के कारण बर्बादी की कगार पर है।

दस्तक7मिडिया, उत्तम सेनगुप्ता, दरभंगा।

बिरौल प्रखंड मुख्यालय स्थित खादी भंडार जो कभी खादी वस्त्र निर्माण का केंद्र था और महत्वपूर्ण व्यक्तियों का आश्रय स्थल माना जाता था, आज उपेक्षा के कारण बर्बादी की कगार पर है। यहं प्रबंधक की मिलीभगत से आसपास के लोग खादी भंडार की भूमि पर अवैध कब्जा कर रहे हैं और इस ओर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है।
एक समय था जब यहां विनोबा भावे,जयप्रकाश नारायण, हरिनाथ मिश्र,ललित नारायण मिश्र, का इस स्थान से जुड़ाव इसकी महत्ता को और भी बढ़ा देता है। उस दौर के स्वतंत्रता सेनानियों और प्रशासनिक अधिकारियों का यहाँ ठहरना इस बात का जीवंत प्रमाण है कि यह स्थान न केवल खादी और ग्रामोद्योग का केंद्र था, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों का भी एक महत्वपूर्ण संगम स्थल था।
उस समय, स्वतंत्रता के बाद राष्ट्र निर्माण का दौर चल रहा था। खादी और ग्रामोद्योग आत्मनिर्भरता और स्वदेशी आंदोलन के प्रतीक थे, जिनका गहरा प्रभाव समाज पर था। बिरौल खादी ग्रामोद्योग संघ जैसे संस्थान इस विचारधारा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे।विनोबा भावे और जयप्रकाश नारायण जैसे महान नेताओं का यहाँ आना इस बात को दर्शाता है कि वे जमीनी स्तर पर काम कर रहे संस्थानों और व्यक्तियों से जुड़कर राष्ट्र के विकास की नींव मजबूत करना चाहते थे। विनोबा भावे का भूदान आंदोलन और जयप्रकाश नारायण का सर्वोदय आंदोलन इसी दिशा में किए गए महत्वपूर्ण प्रयास थे, और ऐसे संस्थानों का दौरा उनके विचारों के प्रसार और लोगों को संगठित करने में सहायक रहा होगा।
हरिनाथ मिश्र, ललित नारायण मिश्र,कर्पूरी ठाकुर, जगन्नाथ मिश्र,डॉ.महावीर प्रसाद, रामविलास पासवान जैसे उच्च स्तरीय नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों का यहाँ ठहरना यह भी संकेत करता है कि यह स्थान स्थानीय स्तर पर भी कितना महत्वपूर्ण था। यह संभव है कि यहाँ पर क्षेत्र के विकास, सामाजिक मुद्दों, और सरकारी योजनाओं पर विचार-विमर्श होता रहा होगा। स्वतंत्रता सेनानियों की उपस्थिति उस दौर के त्याग और बलिदान की याद दिलाती होगी और नई पीढ़ी को प्रेरित करती होगी।
यह कल्पना करना भी रोमांचक है कि उस समय इस परिसर में कैसा माहौल रहा होगा। विभिन्न विचारधाराओं के लोगों का एक साथ आना, राष्ट्र निर्माण की योजनाओं पर चर्चा करना, और खादी के माध्यम से आत्मनिर्भरता के सपने को साकार करने की कोशिश करना यह सब मिलकर एक जीवंत और प्रेरणादायक तस्वीर बनाता है। वर्ष 2017 में बिरौल खादी भंडार के विकास के लिए मंत्री महेश्वर हजारी और विधायक शशि भूषण हजारी स्तर पर भी प्रयास किए गए थे, लेकिन अब स्थिति ऐसी हो गई है कि यह पहल केवल चर्चाओं और कागजों तक सिमट कर रह गई है। स्थानीय लोगों में बलराम टेकड़ीबाल,सनोज नायक,बैजु चौधरी, विनोद चौधरी, प्रदीप प्रधान,कवीर महतो सहित कई लोगों ने जो जानकारी दी है, वह इस प्रतिष्ठित संस्थान की वर्तमान दुर्दशा को स्पष्ट रूप से दर्शाती है। लोगों का कहना है कि अपने को इस संस्थान का प्रबंधक कहने वाले एक व्यक्ति के द्वारा परिसर में लगे बड़े बड़े पेड़, खादी कपड़े का बुनाई करने वाला किमती मशीन आदि को कौड़ी के भाव में कबाड़खाना में बेच दिया गया। खादी ग्रामोद्योग संघ का खादी भंडार न केवल वस्त्र निर्माण का केंद्र था, बल्कि यह स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार का भी एक महत्वपूर्ण स्रोत था। इसकी बर्बादी से न केवल इसकी ऐतिहासिक पहचान मिट रही है, बल्कि देश के एक धरोहर को कुछ भूमाफिया द्वारा उसे बेचने का भी प्रयास किया जा रहा है। इधर भाजपा किसान मोर्चा के जिलाध्यक्ष संजय सिंह पप्पू सिंह ने दुख प्रकट करते हुए कहा कि देश के इस धरोहर को बर्बाद होने से रोकने के लिए यह आवश्यक है कि संबंधित अधिकारी और सरकार इस मामले पर तत्काल ध्यान दें। संघ की संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए और अवैध कब्जों को हटाया जाना चाहिए। श्री सिंह ने कहा कि इसके अतिरिक्त, इस संस्थान को पुनर्जीवित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए ताकि यह फिर से अपने गौरव को प्राप्त कर सके और स्थानीय लोगों के लिए विकास और समृद्धि का केंद्र बन सके। इस परिसर का सौंदर्यीकरण कर प्रमुख जनजातियां एवं अधिकारियों के लिए विश्राम स्थल के रूप में इसका उपयोग किया जा सकता है।