नाबालिग के साथ छेड़छाड़ एवं लज्जा भंग करने के जुर्म में आरोपी को तीन वर्ष की सजा ,एवं 25हजार का अर्थदंड।

दस्तक 7मीडिया दरभंगा, विधि संवाददाता/

दरभंगा न्याय मंडल के पॉक्सो अदालत के बिशेष न्यायाधीश प्रोतिमा परिहार ने एक नाबालिग लड़की के घर में प्रवेश कर उसके साथ छेड़छाड़ करने लैंगिक अत्याचार व लज्जा भंग करने के लिए आपराधिक बल प्रयोग करने के जूर्म में केवटी थाना क्षेत्र के एक गाँव के दिलीप पासवान के पुत्र शंकर पासवान को तीन वर्षों की कारावास और पच्चीस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सोमवार को सुनाई है। अर्थदंड की राशि पीड़िता को देने का न्यायिक आदेश पारित की गई है। वहीं पीड़िता को तीन लाख रुपये प्रतिकर जिला विधिक सेवा प्राधिकार के माध्यम से देने का न्यायिक आदेश हुई है। नाबालिग के प्रथम सूचना प्रतिवेदन पर 8 अगस्त 2020 को घटित घटना को लेकर 43/2020 के तहत अभियुक्त शंकर पासवान रामाशीष पासवान, दिलीप पासवान के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया गया। सूचिका के अधिवक्ता संतोष कुमार सिंहा ने बताया कि मामलें के अनुसंधानक ने अभियुक्त शंकर पासवान के विरुद्ध प्राथमिकी में लगाये गये आरोप को सही पाकर आरोप पत्र संख्या 62/20 दिनांक 11 नवम्बर 20 को समर्पित किया। पॉक्सो की अदालत ने दिनांक 25 नवम्बर 20 को भादवि की धारा 376, पॉक्सो एक्ट के 4/6 में संज्ञान लिया। अदालत ने 24 फरवरी 21 को 376(3) भादवि और 4/6 पॉक्सो की धारा में आरोप गठन किया गया। विशेष लोक अभियोजक विजय कुमार पराजित ने बताया कि अभियोजन पक्ष से 8 गवाहों का साक्ष्य अदालत में प्रस्तुत किया गया और उभय पक्ष के बहस उपरांत सोमवार को कोर्ट के बिशेष न्यायाधीश प्रोतिमा परिहार ने 12 पॉक्सो एक्ट में 3 वर्ष की कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड एवं भादवि की धारा 452 में 2 वर्ष, और पांच हजार रुपया, 506 में 3 वर्ष और पांच हजार रुपया, 354 में 2 वर्ष और पांच हजार रुपया एवं 354(ए) में 2 वर्ष और पांच हजार रुपया अर्थदंड की सजा सुनाई है। स्पेशल पीपी के अनुसार सभी सजायें साथ-साथ चलेगी। वहीं इसी मामले में दो अभियुक्त क्रमशः दिलीप पासवान और रामाशीष पासवान के बिरुद्ध 28नवम्वर 2022 को अदालत ने संज्ञान ली है।जो अदालत में आरोप गठन के लिए चल रही है। वहीं आरोप गठन से मुक्त करने के लिए अभियुक्त द्वय का मामला पटना उच्च न्यायालय में लंबित है।