स्वास्थ्य विभाग की उदासीनता से खुले बाजारों में बिक रहे नकली खाद्य पदार्थ और पेय जल। लोगों के स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा है।

दस्तक7मिडिया, उत्तम सेनगुप्ता, दरभंगा।

स्वास्थ्य विभाग की उदासीनता और खुले बाजारों में बिक रहे नकली खाद्य पदार्थों और पेय जल की समस्या काफी गंभीर है। एक विवाह समारोह में परोसे गए शीतल पेय जल की बोतलों की तस्वीर इस लापरवाही का जीता-जागता प्रमाण है। यह स्थिति न केवल निराशाजनक है, बल्कि लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी एक बड़ा खतरा है। जानकारी के अनुसार
खुले बाजारों में धड़ल्ले से बिक रहे नकली पेय जल और अन्य खाद्य सामग्री एक संगठित अपराध की तरह फैल रहा है। मुनाफाखोर नकली उत्पादों को असली की तरह पैकेज करके बेच रहे हैं, जिससे आम consumers आसानी से धोखा खा जाते हैं। इन नकली उत्पादों में हानिकारक रसायन और मिलावटी चीजें हो सकती हैं, जिनका सेवन करने से पेट दर्द, उल्टी, दस्त से लेकर गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं और यहां तक कि जानलेवा बीमारियां भी हो सकती हैं।
यह आश्चर्य की बात है कि स्वास्थ्य विभाग इस गंभीर मुद्दे पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे रहा है। विभाग की जिम्मेदारी है कि वह नियमित रूप से बाजारों में बिक रहे खाद्य पदार्थों और पेय जल की गुणवत्ता की जांच करे और नकली उत्पाद बेचने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे। अगर स्वास्थ्य विभाग अपने कार्यों के प्रति सजग होता, तो खुले बाजारों में इस तरह नकली खाद्य पदार्थ की बाढ़ नहीं आती। इस संबंध में अधिवक्ता नटवर कुमार मिश्र का कहना है कि बाजारों और खाद्य पदार्थ सामग्री का नियमित और औचक निरीक्षण किया जाए। बेचे जा रहे खाद्य पदार्थों और पेय जल के नमूनों की नियमित रूप से गुणवत्ता जांच की जाए। अधिवक्ता श्री मिश्र ने कहा कि नकली उत्पाद बेचने वालों पर भारी जुर्माना लगाया जाए और उनके लाइसेंस रद्द किए जाएं। उपभोक्ताओं को नकली और असली उत्पादों की पहचान करने के बारे में शिक्षित करने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाए जाएं।