पटना जिला के राजीव नगर थाने के चालक समेत दस पुलिसकर्मी /पदाधिकारी निलंबित ,डीजीपी के जांच के निर्देश के बाद पीड़ित दुकानदार को न्याय की जगी आस।कांडों के समीक्षा के दौरान कहाँ रहते हें एसपी /एसएसपी /डीआईजी /आईजी की नजर ?

दस्तक 7मीडिया /संजय कुमार राय 

पटना जिला के अलावे राज्य के कई जिले हें जहां पुलिस के कार्यशैली को लेकर सवाल उठ रहें हें।इसी गलत कार्यशैली को लेकर पटना जिला के राजीव नगर थाना के अंचल निरीक्षक गौतम कुमार ,थानाध्यक्ष नीरज कुमार ,दरोगा शंभू शंकर सिंह ,श्याम नारायण सिंह ,सिपाही अनिल कुमार ,सिपाही ब्रज किशोर प्रसाद ,हरीशचंद्र सिंह ,प्रभाष कुमार पासवान ,ओम प्रकाश एवं चालक बाल किशोर यादव को निलंबित किया गया हें और अब विभागीय कार्यवाही भी चलेगी ,यह सब डीजीपी के द्वारा दिये गये जांच के बाद संभव हो सका हें और अब पीड़ित दुकानदार को न्याय मिलने की उम्मीद भी जगी हें।

बिना जब्ती सूची बनाए दुकानदारों से ऐंठा कई मोबाईल 

आरोप था कि राजीव नगर थाने के एक मोबाईल दुकानदार को ये पुलिस वाले परेशान किया करता  था , यही नहीं धमकी देकर मोबाईल दुकानदार से कई मोबाईल भी ऐंठ लिया था ,मोबाईल ऐंठने के पीछे कारण था कि राजीव नगर थाने द्वारा कुछ दिन पहले संदेह के आधार पर एक मोटरसाईकल समेत दो मोबाईल के साथ तीन लोंगों को गिरफ्तार किया गया था।इसी निशानदेही पर पुलिस ने आवेदक के दुकान पर छापेमारी की और उसके बेटे को गिरफ्तार किया। इस दौरान बिना जब्ती सूची बनाए कई मोबाईल दुकान से पुलिस ने लिया , पांच कीमती मोबाईल पुलिस ने अवैध ढंग से रखा और कुछ मोबाईल वापस भी कर दिया।

चोरी के संदेह पर आवेदक के पुत्र को जबरन उठाया था राजीव नगर थाने की पुलिस ,बिना जांच के ही न्यायालय में कर दिया आरोप समर्पित।

चोरी के संदेह पर छापेमारी जो शुरुआत में की गई थी जिसमें दो मोबाईल और मोटरसाईकल जब्त  की गई थी ,उसका अनुसंधान भी पुलिस ने नहीं किया था। यही नहीं तीन मोबाईल जो जब्त किया गया था वह चोरी के नहीं थे बावजूद इसके पुलिस ने आवेदक के पुत्र समेत सभी के विरुद्ध न्यायालय में आरोप पत्र समर्पित कर दिया।

दस पुलिसकर्मियों पर चलेगी विभागीय कारवाई 

इसे मामले को लेकर आवेदक ने डीजीपी विनय कुमार से न्याय की गुहार लगायी , जिसे डीजीपी ने गंभीरता से लिया और मामले को जांच में दिया। जांच में पुलिस कर्मियों /पदाधिकारियों की संलिप्ता पायी गई। पुलिस मुख्यालय ने दोषी पाए गये दस पुलिसकर्मियों /पदाधिकारियों के विरुद्ध विभागीय कारवाई का आदेश दे दिया हें।

एसपी /एसएसपी ,डीआईजी /आईजी के द्वारा कांडों की समीक्षा के दौरान ऐसे मामले उजागर क्यूँ नहीं होते ?

अब सवाल उठता हें कि जिले के एसपी थानावार जब कांडों की समीक्षा करते हें तों उनके समीक्षा के दौरान ऐसे मामले की कमिया क्यूँ उजागर  नहीं होती  ?
ऐसे में जिले के एसपी पर भी प्रश्न उठना लाजमी हें यही नहीं इन दिनों क्षेत्र के आईजी /डीआईजी भी कांडों की समीक्षा में लीन रहते हें फिर ऐसे गलत कार्यशैली वाले पुलिसकर्मियों द्वारा की गई गलत कारवाई पर उनकी नजर भी नहीं जाती हें।फिर समीक्षा करने की क्या जरूरत ?
डीजीपी के पास आवेदन जाने के बाद ही जांचों उपरांत कारवाई होगी तों फिर जिले के डीएसपी ,एसपी /एसएसपी /डीआईजी /आईजी के पद पर विराजमान होने का क्या मतलब ,सवाल तों बनता ही हें।

डीएसपी से लेकर आईजी तक के कार्यशैली में बदलाव होना जरूरी ,तभी आम लोंगों को मिल सकेगा न्याय 

यहां बता दे कि डीएसपी से लेकर आईजी तक के पुलिस पदाधिकारियों की जब तक कार्यशैली नहीं बदलेगी तब तक बिहार में पुलिसिया कार्यशैली को लेकर ऐसी चर्चा चलती रहेगी। अकेले डीजीपी क्या क्या करेंगे जबतक उनके अधीनस्थ काम कर रहें पुलिस पदाधिकारियों के काम करने का तरीका नहीं बदलेगा।