मधुबनी जिला के अरेर थानाध्यक्ष के क्या हें जलवे ,मनमर्जी तरीके से चल रही हें थानेदारी ,ना डीएसपी की परवाह,ना ही एसपी का हें डर ?एक माह पूर्व ट्रक की ठोकर से हुई मौत के मामले में अबतक प्राथमिकी दर्ज नहीं , डीएसपी,एसपी का प्रतिवेदन धूल फांक रहा,कारवाई नदारद।
दस्तक 7मीडिया /संजय कुमार राय
पुलिसिया कार्य संस्कृति में सुधार को लेकर बिहार के पुलिस महानिदेशक विनय कुमार अथक प्रयास कर रहें हें ,वहीं कुछ जिलों के वरीय पुलिस अधिकारी अपने आदतों से मजबूर हें।
जी हाँ हम बात मधुबनी पुलिस के पुलिसिया कार्यशैली को लेकर कर रहें हें।ऐसा प्रतीत हो रहा हें कि मधुबनी के एसपी से लेकर डीएसपी तक कागजी खेल रहें हें , दोषी पाए जाने पर भी थानाध्यक्ष को निलंबित नहीं करते उनपर कारवाई नहीं करते सिर्फ कागजी घोड़ा दौड़कर मामला इति श्री कर देते।ऐसा लग रहा हें कि पुलिसिया कार्यसंस्कृति से इन्हें कोई मतलब नहीं हें। इस कागजी खेल में कहीं पैसों का खेल तों नहीं चल रहा हें ?
अगर ऐसा नहीं हें तों अरेर थानाध्यक्ष पर पुलिस अधीक्षक ने एक माह बीतने के बाद भी अब तक कारवाई क्यूँ नहीं की जबकि मामला बहुत ही गंभीर हें। सवाल यही हें कि क्या मधुबनी के थाने को बेचा जा रहा हें और समय अवधि के अनुसार बेचा जा रहा हें ?अगर नहीं तों एक महीना बीत जाने के बावजूद अरेर के थानाध्यक्ष पर अब तक कारवाई नहीं होना सवाल तों बनता ही हें।
यातायात पुलिस अधीक्षक सुजीत कुमार के ही प्रतिवेदन की बात करें तों उन्होंने 12मार्च 25को ही अरेर के थानाध्यक्ष से 24घंटे के भीतर स्पष्टीकरण की मांग की थी, स्पष्टीकरण नहीं देने पर अनुशासनिक कारवाई समेत वरीय पदाधिकारी को पत्र देने की बात कहीं थी लेकिन एक महीना बीतने के बाद भी अभी तक कोई कारवाई अरेर थानाध्यक्ष पर नहीं हुई।
यातायात डीएसपी के प्रतिवेदन में कहा गया था कि पकरौली गांव में सड़क दुर्घटना में एक ट्रक की ठोकर से राहगीर की मृत्यु हुई , मृत्यु की सूचना मधुबनी जिला के व्हाट्स ऐप ग्रुप में अरेर थानाध्यक्ष द्वारा डाली गई थी , इस सूचना के तुरंत बाद अरेर थानाध्यक्ष ने व्हाट्सऐप ग्रुप से मेसेज को डिलीट कर दिया।डीएसपी ने अरेर थानाध्यक्ष से इस बाबत जानकारी मांगी ।थानाध्यक्ष ने डीएसपी यातायात को जवाब दिया कि में थाना पर नहीं हूं ,थाना लौटते ही पूरी जानकारी से अवगत कराऊंगा ,लेकिन मैंने ट्रक को पकड़ लिया हें,इसके बाद अरेर थानाध्यक्ष ने यातायात डीएसपी को फोन करना उचित नहीं समझा।
यातायात डीएसपी ने अपने ही प्रतिवेदन में कहा हें कि 13मार्च को उन्होंने फिर थानाध्यक्ष से जानकारी मांगी तों थानाध्यक्ष ने उन्हें बताया कि इस मामले में प्राथमिकी नहीं दर्ज की गई हें और बिना बेधानिक कारवाई के गाड़ी को छोड़ दिया गया हें। इसे लेकर यातायात डीएसपी ने थानाध्यक्ष को पत्र लिखते हुये कहा कि थानाध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद पर रहते हुये इस तरह की गैर जिम्मेदारना कारवाई निश्चित रूप से आपके कार्य के प्रति संवेदनहीनता और मनमानेपन को दर्शाता हें।
बात यही खत्म नहीं हुई इस बात की जानकारी जब मधुबनी एसपी को हुई तों उन्होंने 30मार्च 25को अरेर थानाध्यक्ष पुअनि 94नेहा कुमारी से विभागीय कारवाई के विरुद्ध 5दिनों के भीतर इस मामले में स्पष्टीकरण देने को कहा अन्यथा यह समझा जाएगा कि आपको अपने बचाव में कुछ नहीं कहना हें और अग्रतर कारवाई की जाएगी। एसपी के इस पत्र के भी कई दिन गुजर गये लेकिन अरेर थानाध्यक्ष पर अब तक कोई कारवाई नहीं हुई हें।जबकि ट्रक के धक्के से हुई मौत के बाद अरेर थानाध्यक्ष द्वारा कारवाई नहीं करने के मामले में एसपी ने अपने प्रतिवेदन में कहा हें कि कहीं आपके द्वारा मामला रफा -दफा तों नहीं कर दिया गया।
अब एसपी समेत यातायात डीएसपी के संज्ञान में यह जानकारी रहते हुये सिर्फ स्पष्टीकरण की मांग कर मामले में कारवाई नहीं करना थानाध्यक्ष के मनमानीपन को बढ़ावा देता हें यही नहीं ऐसे में विभाग का अनुशासन भी खत्म होता ही हें और पुलिसिया कार्य संस्कृति भी ज्यादा प्रभावित होती हें।
सड़क दुर्घटना में हुई मौत के बाद थाना में थानाध्यक्ष द्वारा प्राथमिकी दर्ज नहीं करना यह स्वयं में अपराध हें।ऐसे में मृतक के परिवार को सरकारी मुआवजा कैसे मिलेगा ?
सूत्रों पर भरोसा करें तों कहना हें कि मृतक गरीब परिवार से था , मृतक परिवार समेत थानाध्यक्ष से इस मामले में ट्रक मालिक ने बड़ी डील की और मामले को रफा -दफा कर दिया ॥इस कारण थानाध्यक्ष ने ट्रक समेत चालक को छोड़ दिया यहां तक की यातायात पुलिस को सूचना देना तक मुनासिब नहीं समझा और ना ही प्राथमिकी दर्ज किया।
