12 दिनों के बाद नवादा से हाथियों के झुंड को झारखंड के जंगलों में भेज दिया गया है. इससे ग्रामीणों में काफी खुशी है.
नवादा: बिहार के नवादा में हाथियों का आतंक खत्म हो गया है. बंगाल के बांकुरा से आई वन विभाग की स्पेशल टीम ने ग्रामीणों को हाथियों से मुक्ति दिलाई. मामला रजौली प्रखंड क्षेत्र के बाराचुआं गांव का है. जहां करीब 30 हाथियों का झुंड ग्रामीण इलाकों में घुस कर पिछले 12 दिनों से लगातार आतंक मचा रहा था.
नवादा में 30 हाथियों झुंड:हाथियों के झुंड ने कई एकड़ के फसलों को भी बर्बाद कर दिया साथ ही हाथियों के आतंक से लोग अपने घरों से पलायन करने को मजबूर थे. हालांकि स्थानीय वन विभाग की टीम हाथियों को खदेड़ने में जुटी हुई थी, लेकिन वे सफल नहीं हो पा रहे थे. मामले को लेकर वन विभाग के अधिकारियों ने पश्चिम बंगाल के बांकुरा से हाथी स्पेशल टीम बुलाई जिसने काफी मशक्कत के बाद हाथियों को जंगल में वापस भेजा गया.
हाथियों का आंतक
हाथियों ने कई घरों तोड़ा:हाथियों को भगाने में डीएफओ नवादा श्रेष्ठ कुमार कृष्ण व रेंजर मनोज कुमार समेत वन कर्मियों एवं पश्चिम बंगाल के बांकुरा से आई स्पेशल टीम का योगदान सराहनीय रहा. हाथियों के झुंड से कई ग्रामीणों के घरों को तोड़फोड़ दिया और कइयों के खेतों में लगे लहलहाती फसल को नष्ट कर दिया था. वहीं वन विभाग ग्रामीणों को हुए नुकसान की भरपाई को लेकर अग्रतर कार्रवाई में जुटी हुई है.
“हाथियों के झुंड को वापस उनके घर झारखंड के जंगली क्षेत्र में छोड़ा गया है. हालांकि बांकुरा से आए टीम को वन परिसर में रोका गया है. वहीं हाथियों के झुंड पुनः रजौली वन क्षेत्र में प्रवेश ना करे, इसको लेकर वन कर्मियों को सावधान रहने की हिदायत दी गई है.”-मनोज कुमार, रेंजर
हाथियों का 30 झुंड
30 हाथी का झुंड:30 हाथियों के झुंड को 12 दिनों बाद वापस अपने क्षेत्र में भेजा गया. बताया जाता है कि रजौली प्रखंड क्षेत्र के बाराचुआं में झारखंड से बिहार में प्रवेश किये थे. हाथियों के उत्पात से लोग अपने घरों से पलायन करने को मजबूर थे.
लोगों में खुशी:हाथियों के झुंड के वापस झारखंड लौटने पर जंगली क्षेत्र के आसपास रहने वाले विभिन्न गांव के लोगों में काफी खुशी है. इस दौरान वाइल्ड लाइफ ट्रैकर अर्जुन सिंह चंद्रवंशी, आनंद कुमार सिंह, सतीश कुमार एवं दिलीप कुमार समेत अन्य लोगों का सहयोग सराहनीय रहा. हाथियों का झुंड बाराचुआं में एक दिन रहे, फिर दूसरे दिन सुअर लेटी पहुंचे, तीसरे व चौथे दिन चोरडीहा में बिताए.
हाथियों से परेशान ग्रामीण
झारखंड के जंगलों में छोड़ा: बताया जाता है कि पांचवें दिन बकरखुरी, छठे दिन नावाडीह व झराही में रहे, सातवें दिन जमुनदाहा में रहने के बाद तीन दिनों तक पिछली जमुनदाहा से राधे बिगहा से पुरानी हरदिया से श्रृंगी ऋषि पहाड़ होते हुए बाराचुआं से गढ़ दिबौर डैम से होते हुए रतनपुर आकर दो दिनों तक रुके एवं अंतिम दिन में झारखंड के मेघातरी पहाड़ को चढ़कर लठवहवा जंगल तक छोड़ दिया गया.
