बच्चों के अच्छे संस्कार समाज को दे जाता हें नसीहत ,महज कुछ साल के एक बच्चे ने घर की जिम्मेदारी उठाते हुये दसवीं बोर्ड में लाया 91%अंक।

दस्तक 7मीडिया ,दरभंगा /

अपने परिवार का कंधों पर बोझ लेकर आशीष रंजन की 10वीं बोर्ड परीक्षा में 91% अंक प्राप्त करना वास्तव में सराहनीय है, खासकर उन चुनौतियों को देखते हुए जिनका उन्होंने सामना किया है।

कम उम्र में आशीष ने पिता को खो दिया इसके बाद उसकी मां ने सभी जिम्मेदारी संभाला और आशीष की देखभाल की। आशीष की माँ की यह जिम्मेदारी किसी चुनौती से कम नहीं थी ,जमीन के छोटे टुकड़ों से अपनी गुजर बसर और बच्चे को पढ़ाना बड़ी जिम्मेदारी थी।

बढ़ रहें उम्र के साथ साथ आशीष की पढ़ाई में लगन और मां की देखभाल की जिम्मेदारी छोटे से उम्र में एहसास होने लगी, वह अपनी पढ़ाई के लिए छोटे छात्रों को ट्यूशन पढ़ाता हैं अपनी माँ की देखभाल भी करता हैं, जो इन दिनों कई बीमारियों से जूझ रही हें । अपनी पढ़ाई के प्रति आशीष की अटूट प्रतिबद्धता अन्य छात्रों के लिए एक प्रेरणा श्रोत है।

छोटी सी उम्र में ही उसकी यह समझदारी, मां के प्रति सेवा भाव ,ट्यूशन पढ़ाते हुये घर -परिवार की बोझ को उठाना इसके बाद अपनी पढ़ाई करना समाज के बच्चों के लिये एक सीख हें।

आशीष की दृढ़ता और सफलता व्यक्तिगत परिस्थितियों की परवाह किए बिना समर्पण और कड़ी मेहनत के महत्व को रेखांकित करती है।